– दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना नहीं होगा पंजीकरण
– 1 अक्टूबर से लागू होगी नई व्यवस्था
लखनऊ। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराने वालों के लिए अब प्रक्रिया और सख्त होने जा रही है। केंद्र सरकार ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969 में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत एक अक्टूबर 2026 से दो साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों का पंजीकरण न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के आदेश के बाद ही हो सकेगा।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक देरी से देने पर संबंधित मामले का पंजीकरण जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति और सत्यापन के बाद किया जा सकेगा। वहीं दो वर्ष से अधिक पुराना मामला होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी का आदेश आवश्यक होगा।
नई व्यवस्था में देरी से पंजीकरण कराने वाले मामलों में जन्म या मृत्यु की वास्तविकता का सत्यापन भी महत्वपूर्ण होगा। इसका उद्देश्य रिकॉर्ड में गलत या हेरफेर के जरिए पंजीकरण कराने की संभावनाओं को रोकना और जन्म-मृत्यु का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना है।
रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की ओर से बताया गया है कि प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। इसलिए पुराने जन्म या मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों को नए नियमों के तहत आवश्यक अनुमति और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यानी अब दो साल से ज्यादा पुराने मामले में सीधे कार्यालय जाकर प्रमाण पत्र बनवाना संभव नहीं होगा। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।


