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Sunday, September 20, 2026

आलू की मंदी ने किसानों के साथ बैंकों को भी संकट में डाला, 30,641 किसानों के केसीसी खाते एनपीए

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फर्रुखाबाद। आलू की लगातार मंदी ने किसानों की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी है। फसल की लागत तक नहीं निकल पाने के कारण किसान बैंकों से लिया गया केसीसी ऋण भी नहीं चुका पा रहे हैं। इसका असर अब बैंकों पर भी दिखाई देने लगा है। जिले में केसीसी धारक 1,06,137 किसानों पर कुल 1,733.04 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है। इनमें 30,641 किसान ऐसे हैं, जो 367.02 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के बाद मूलधन तो दूर, ब्याज तक जमा नहीं कर सके हैं। लगातार भुगतान न होने के कारण इन किसानों के केसीसी खाते एनपीए हो गए हैं। ऋण की वसूली का लक्ष्य पूरा करने में बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी परेशान हैं।
फर्रुखाबाद में किसान प्रमुख रूप से आलू की खेती पर निर्भर हैं। पिछले दो साल से आलू की कीमतों में अपेक्षित सुधार न होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने केसीसी से ऋण लेकर फसल की लागत पूरी की और करीब 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की गई। इस वर्ष भी शुरुआत से ही आलू के भाव अच्छे नहीं रहे। ऐसे में किसानों ने बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में अपनी फसल शीतगृहों में भंडारित कर दी।
जनपद में कुल 121 शीतगृह हैं, जिनकी भंडारण क्षमता 10,71,964.63 मीट्रिक टन है। इसके मुकाबले इस बार 9,72,812.08 मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया। किसानों को उम्मीद थी कि बाद में बाजार में भाव बढ़ेंगे और वह उचित कीमत पर अपनी उपज बेच सकेंगे, लेकिन अभी तक आलू के भाव में अपेक्षित तेजी नहीं आई है।
आलू का भाव नहीं बढ़ने के कारण अब तक शीतगृहों से केवल करीब 29 प्रतिशत आलू की ही निकासी हो सकी है। अभी भी शीतगृहों में 6,90,696.58 मीट्रिक टन आलू भंडारित बताया जा रहा है। किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि शीतगृह से आलू निकालने के बाद भंडारण शुल्क, परिवहन भाड़ा और अन्य खर्च जोड़ने पर बिक्री से पर्याप्त रकम बचती दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में किसान मजबूरी में अपनी उपज रोककर बैठे हैं।
आलू की बिक्री से पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। जिन किसानों ने फसल की लागत लगाने के लिए केसीसी से ऋण लिया था, वे अब बैंक का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं। जिले में करीब 2.50 लाख किसान हैं, जिनमें 1,06,137 किसानों के केसीसी बने हुए हैं। इन किसानों ने विभिन्न बैंकों से केसीसी के माध्यम से ऋण लिया है। आलू की मंदी के कारण बड़ी संख्या में किसान समय पर ऋण नहीं चुका सके हैं। इससे बैंकों पर किसानों का कुल 1,733.04 करोड़ रुपये बकाया है।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव करथिया निवासी प्रदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने बैंक से केसीसी पर ऋण लेकर आलू की खेती की थी। आलू का भाव कम होने के कारण उन्होंने अभी तक फसल की बिक्री नहीं की है। बिक्री नहीं होने से केसीसी का ऋण भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक आलू का उचित भाव नहीं मिलेगा, तब तक ऋण चुकाना मुश्किल है।
गांव नहरैया निवासी जगपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने भी केसीसी पर ऋण लेकर आलू की बोआई की थी। मंदी के चलते आलू अभी तक नहीं बेच पाए हैं। इसी वजह से बैंक का ऋण भी जमा नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि यदि आलू का भाव अच्छा मिल गया तो बैंक का कर्ज चुका देंगे, अन्यथा अगली फसल की आमदनी के बाद ही ऋण जमा कर पाना संभव होगा।
बैंकों की ओर से भी ऋण की वसूली को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वसूली करना बैंक कर्मचारियों के लिए चुनौती बन गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बैंक कर्मियों द्वारा किसानों पर ऋण जमा करने का दबाव नहीं बनाए जाने की बात भी सामने आई है।
केसीसी ऋण समय से चुकाने वाले किसानों को ब्याज में राहत भी मिलती है। एक वर्ष के अंदर ऋण अदा करने पर किसानों को ब्याज पर तीन प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिलता है, जिसके बाद प्रभावी ब्याज दर चार प्रतिशत रह जाती है। निर्धारित समय पर ऋण जमा नहीं करने पर ब्याज दर सात प्रतिशत तक हो जाती है। ऐसे में किसानों के सामने आलू की कीमत में सुधार और समय पर ऋण भुगतान दोनों बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
आलू की कीमतों में लंबे समय से जारी मंदी ने किसानों की आय को प्रभावित किया है। बड़ी मात्रा में आलू अभी भी शीतगृहों में भंडारित है और किसान बाजार में बेहतर भाव मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं दूसरी ओर केसीसी ऋण की बढ़ती बकाया राशि ने बैंकों की चिंता भी बढ़ा दी है। किसानों को अब उम्मीद है कि आलू के भाव में सुधार होगा, जिससे वे फसल बेचकर अपनी लागत निकालने के साथ बैंक का कर्ज भी चुका सकेंगे।

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