कहीं नदी में समा रही जमीन तो कहीं नहर में बहा युवक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। शनिवार को लखनऊ, झांसी, बहराइच, गोंडा और गोरखपुर समेत कई जिलों में बारिश हुई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 31 जिलों में हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 12 से 24 घंटे में राजस्थान की ओर से मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई गई है।
लगातार हुई बारिश से उफनाई नदियों का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। गोंडा में घाघरा नदी का पानी कम होने से करीब 25 गांवों से बाढ़ का पानी उतर गया है, लेकिन 10 गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। तरबगंज और कर्नलगंज तहसील क्षेत्रों में कटान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटे में 20 बीघा से अधिक कृषि भूमि नदी में समा गई। खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल भी कटान की चपेट में आ रही है।
मऊ में सरयू नदी का जलस्तर घटने के बावजूद कटान का खतरा बढ़ गया है। पिछले दो दिनों में करीब पांच बीघा कृषि योग्य जमीन नदी में समा चुकी है। नईबाजार के सरहरा पुरवे के सामने नदी तेजी से आबादी की ओर बढ़ रही है और नदी तथा घरों के बीच करीब 50 मीटर की दूरी ही बची है। वहीं वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटने से घाटों की सीढ़ियों से पानी उतर गया है, लेकिन घाटों पर कीचड़ जमा होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश और बाढ़ के बीच कई जिलों से अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। बाराबंकी के रामसनेहीघाट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में गुरुवार देर रात कोबरा सांप निकलने से मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप मच गया। वन विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद सांप को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया। पीलीभीत में शुक्रवार शाम गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान 19 वर्षीय युवक संगम हरदोई ब्रांच नहर के तेज बहाव में बह गया। स्थानीय गोताखोरों के साथ एसडीआरएफ की टीम उसकी तलाश में जुटी है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अरब सागर से नमी वाली हवाएं उत्तर प्रदेश की ओर आ रही हैं, जिससे खासकर पूर्वांचल के जिलों में हल्की बारिश की स्थिति बन रही है। हालांकि पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में बारिश धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है। प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक जरूरत के मुकाबले करीब चार फीसद कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून की विदाई के साथ अब किसानों की निगाहें सितंबर के अंतिम दिनों की बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि खेतों में नमी की स्थिति आगामी रबी फसलों की बुआई को भी प्रभावित कर सकती है।


