लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गिनाईं सुशासन की उपलब्धियां
लखनऊ। लोक आयुक्त संगठन, उत्तर प्रदेश के 50वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लैंडयूज से जुड़े मामलों के निस्तारण को लेकर सरकार की व्यवस्था और उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लैंडयूज से संबंधित मामलों में समाधान के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है। यदि 30 दिन के भीतर मामले का समाधान नहीं होता है तो उसे डीम्ड माना जाएगा और किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को लैंडयूज की अनुमति मिलने के बाद यदि प्रक्रिया में गलत निर्णय या अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी उस व्यक्ति की नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाले संबंधित अधिकारी की होगी। सरकार का उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस व्यवस्था का परिणाम भी सामने आया है। पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान लैंडयूज से जुड़े करीब 34 लाख मामलों का समाधान किया गया है। हालांकि, इस अवधि में लगभग 9 लाख नए मामले भी सामने आए हैं, जिनका भी सरकार द्वारा परीक्षण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए मामलों की मेरिट के आधार पर समीक्षा की जा रही है, ताकि पात्र मामलों का नियमानुसार निस्तारण हो सके और अनावश्यक रूप से लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि सुशासन का मूल उद्देश्य यही है कि सरकारी प्रक्रियाएं समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह हों तथा आम नागरिकों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।


