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Monday, September 14, 2026

नीट अब जल्द ही कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनेगी

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डॉ. विजय गर्ग

भारत की मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में जल्द ही एक बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिल सकता है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह के अनुसार, नीट को पारंपरिक कागज-पेन प्रणाली से बदलकर कंप्यूटर आधारित टेस्ट बनाने की तैयारी की जा रही है।

अभिषेक सिंह ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा को “भविष्य” बताते हुए कहा कि जेईई, युजीसी-नेट , सीयुईटी और एनआईएफटी जैसी कई महत्वपूर्ण परीक्षाएँ पहले से ही सीबीटी मोड में आयोजित की जा रही हैं। नीट भी इस प्रणाली में शामिल होने वाली प्रमुख परीक्षाओं में से एक होगी।

हालाँकि, कागज से कंप्यूटर की ओर बदलाव केवल तकनीक बदलने तक सीमित नहीं होगा। इसके लिए बड़े स्तर पर परीक्षा केंद्रों का बुनियादी ढाँचा विकसित करना, तकनीकी सुरक्षा बढ़ाना और परीक्षा में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्थाएँ करना आवश्यक होगा।

इस विषय पर इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स भी काम कर रही है। नीट से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बाद देशभर में उठी चिंताओं और विरोधों को देखते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

भारत से आगे वैश्विक स्तर की ओर

एनटीए अब केवल देश के भीतर परीक्षाएँ आयोजित करने तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाएँ आयोजित करने की दिशा में भी आगे बढ़ने की योजना बना रहा है।

इससे पहले भारत की अपनी परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना प्रमुख लक्ष्य होगा, ताकि परीक्षाएँ बिना अनियमितता, नकल और तकनीकी त्रुटियों के आयोजित की जा सकें।

परीक्षाओं में एआई की बढ़ती भूमिका

भविष्य की परीक्षा प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। एनटीए एआई का उपयोग केवल परीक्षा आयोजित करने के लिए ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी और अनियमितताओं की पहचान के लिए भी करने पर विचार कर रहा है।

परीक्षा के डिजिटल लॉग, डेटा, विद्यार्थियों के व्यवहार संबंधी पैटर्न और डेटा एनालिटिक्स की सहायता से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना संभव हो सकता है। इससे परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है।

बीआरआईसीएस देशों के साथ सहयोग

परीक्षाओं की सुरक्षा और प्रश्न-पत्रों की गोपनीयता से जुड़े मामलों में बीआरआईसीएस देशों के बीच सहयोग की संभावनाएँ भी मौजूद हैं। प्रत्येक देश को परीक्षाओं की सुरक्षा और निष्पक्षता से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए तकनीकी ज्ञान और सफल प्रक्रियाओं को साझा करना उपयोगी हो सकता है।

चीन की गाओकाओ परीक्षा का उदाहरण बताता है कि बड़े स्तर पर परीक्षाओं को आधुनिक तकनीक और मजबूत प्रबंधन के माध्यम से किस प्रकार आयोजित किया जा सकता है।

परीक्षा प्रणाली का नया डिजिटल युग
नीट का कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की ओर बढ़ना भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। डिजिटल तकनीक, एआई, डेटा एनालिटिक्स और मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाएँ परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती हैं।

लेकिन केवल तकनीक ही निष्पक्षता की गारंटी नहीं दे सकती। मजबूत बुनियादी ढाँचा, सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर, तकनीकी तैयारी, सुरक्षा और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक हैं।

नीट के लिए कागज से कंप्यूटर की ओर यह बदलाव केवल परीक्षा का तरीका बदलने की बात नहीं है, बल्कि यह भारत की प्रवेश परीक्षा प्रणाली के एक नए डिजिटल युग की शुरुआत हो सकता है।

डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्रिंसिपल | शैक्षिक स्तंभकार | प्रख्यात वैज्ञानिक
स्ट्रीट कौर चंद, एम एच आर मलोट, पंजाब

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