– सोसायटियों की मांग के बावजूद 15 एजेंसियों का पैनल नहीं हो सका प्रभावी
– बिल्डर से जिम्मेदारी हटाने की तैयारी
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की स्ट्रक्चरल ऑडिट नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2023 में लागू की गई नीति के बावजूद अब तक इसकी प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी है। दूसरी ओर, कई आवासीय सोसायटियों की ओर से लगातार स्ट्रक्चरल ऑडिट कराए जाने की मांग उठाई जा रही है।
सोसायटियों में निर्माण की गुणवत्ता और इमारतों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच प्राधिकरण ने स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के लिए एजेंसियों का पैनल तैयार किया था। इसके लिए 15 एजेंसियों का पैनल बनाया गया, लेकिन जानकारी के मुताबिक इसमें एक भी निजी एजेंसी शामिल नहीं हो सकी। इससे नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में अब प्राधिकरण स्ट्रक्चरल ऑडिट की जिम्मेदारी बिल्डर से हटाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य ऑडिट प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाना माना जा रहा है। यदि जिम्मेदारी बिल्डर से हटती है तो सोसायटियों में रहने वाले लोगों को इमारतों की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति का स्वतंत्र आकलन मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।
नोएडा की कई सोसायटियों के निवासी लंबे समय से स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इमारतों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में प्रक्रिया स्पष्ट, समयबद्ध और पारदर्शी होनी चाहिए।
वर्ष 2023 में नीति लागू होने के बाद भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि बिल्डर से ऑडिट की जिम्मेदारी हटाने और नई व्यवस्था लागू करने को लेकर प्राधिकरण क्या कदम उठाता है।


