➡️ 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका खारिज
➡️ सुप्रीम कोर्ट ने समय से पहले रिहाई की मांग ठुकराई
➡️ 25 साल की कैद पूरी होने का सलेम ने दिया था हवाला
➡️ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया फैसला
➡️ बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही माना
➡️ सलेम ने जेल में मिली रिमिशन और हिरासत की अवधि को 25 साल में जोड़ने की मांग की थी
➡️ कोर्ट के मुताबिक प्रत्यर्पण समझौते के तहत 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी
नई दिल्ली। 1993 मुंबई सीरियल बम धमाकों में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सलेम ने दावा किया था कि वह 25 साल की कैद की अवधि पूरी कर चुका है और उसे रिहा किया जाना चाहिए।
सलेम ने भारत-पुर्तगाल प्रत्यर्पण समझौते का हवाला देते हुए जेल में अर्जित रिमिशन और विचाराधीन कैदी के रूप में बिताई अवधि को 25 साल की सीमा में शामिल करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दलील स्वीकार नहीं की और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
भारत ने पुर्तगाल को प्रत्यर्पण के दौरान आश्वासन दिया था कि सलेम को मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और उसकी कैद 25 साल से अधिक नहीं होगी। हालांकि, अदालत के अनुसार इस 25 साल की अवधि की गणना के आधार पर उसकी रिहाई का समय नवंबर 2030 में पूरा होगा।


