नई दिल्ली: ऐतिहासिक दिल्ली रेस क्लब की जमीन पर बुलडोजर (Bulldozers) गरजा है। दिल्ली रेस क्लब (Delhi Race Club) की 84 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है। जमीन पर बने पुराने और जर्जर ढांचों को पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में गिराया गया। इसके बाद लुटियंस दिल्ली की बेहद कीमती जमीन पर अब केंद्र सरकार का कब्जा हो गया।
बता दें कि दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली रेस क्लब लिमिटेड को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था। क्लब ने एस्टेट ऑफिसर के बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि क्लब को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया गया था लेकिन वह इसमें नाकाम रहा।
पटियाला हाउस कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद भूमि एवं विकास कार्यालय और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जमीन का औपचारिक ट्रांसफर कराया। यह ट्रांसफर जैसी है जहां है के आधार पर किया गया। कागजी कार्रवाई पूरी होते ही परिसर में ध्वस्तीकरण किया। पुराने कई ढांचों को बुलडोजर से हटाया गया। जमीन पर कब्जा लेने के बाद इसके रखरखाव और आगे के विकास की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को दी गई है। यानी अब इस प्राइम लोकेशन की जमीन पर क्लब का पुराना नियंत्रण खत्म होकर सीधे केंद्र सरकार का नियंत्रण हो गया है।
सरकार के मुताबिक रेस क्लब की इस जमीन का लीज दिसंबर 1994 में ही खत्म हो गया था। इसके बाद किसी नए दस्तावेज के जरिए लीज का नवीनीकरण नहीं हुआ। केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में दलील दी गयी थी कि लीज खत्म होने के बाद क्लब सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से काबिज था। यही सरकार की कार्रवाई का सबसे बड़ा आधार बना।
हालांकि मामले की कानूनी लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। क्लब की मुख्य चुनौती अभी अदालत में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 26 सितंबर को होनी है लेकिन फिलहाल अदालत से अंतरिम संरक्षण नहीं मिलने के कारण सरकार ने इंतजार करने के बजाय जमीन का कब्जा अपने हाथ में ले लिया है।


