210 मौतें, 1500 लापता
300 से ज्यादा भारतीयों की तलाश, 116 लोगों का रेस्क्यू
काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह भूस्खलन के बाद आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में आए तेज बहाव और मलबे ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल और तिब्बत में अब तक 210 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 1500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और खराब मौसम के बीच सेना व सुरक्षा एजेंसियां लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार नेपाल में 826 लोग लापता हैं, जिनमें 300 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं। नेपाली सेना ने गुरुवार सुबह रसुवा के टिमुरे इलाके से 116 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, इनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक हैं। इसके अलावा हाकू में जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे सात लोगों को भी जिंदा बचा लिया गया है।
भूस्खलन के बाद आया विनाशकारी सैलाब
बुधवार सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास करीब 8:37 बजे तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआती तौर पर इसे भूकंप माना गया, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। इसके बाद मलबे और पानी का तेज बहाव भोटेकोशी नदी में पहुंचा और देखते ही देखते नेपाल के कई इलाकों में तबाही मचा दी। कई जगह करीब 30 फीट ऊंची लहरें उठने की बात सामने आई है।
42 किलोमीटर सड़क और 32 पुल तबाह
बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बेट्रावती से रसुवागढ़ी सीमा चौकी तक करीब 42 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त या बह गई, जबकि कम से कम 32 बड़े पुल ध्वस्त हो गए हैं। रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में 13 जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 748 मेगावाट बताई गई है।
133 से ज्यादा जलविद्युत कर्मचारी भी लापता
रसुवा की अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 133 से अधिक कर्मचारी और श्रमिक भी लापता हैं। इनमें विदेशी कर्मचारी भी शामिल हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रही हैं।
भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान तेज कर दिया है। भारतीय वायुसेना के विमान से दूसरी खेप में 37.5 टन राहत सामग्री, जरूरी दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए हैं। इससे पहले 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी। दोनों खेप मिलाकर भारत अब तक नेपाल को 47.5 टन मानवीय सहायता भेज चुका है। एनडीआरएफ की टीमें भी स्टैंडबाय पर हैं और नेपाल सरकार की मांग पर उन्हें भेजे जाने की तैयारी है।
25 देशों के नागरिक लापता
नेपाल की इस त्रासदी में कई देशों के नागरिकों के लापता होने की खबर है। भारतीयों के अलावा अमेरिका, इटली, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, रूस, पुर्तगाल और बेल्जियम समेत करीब 25 देशों के नागरिक प्रभावित बताए गए हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे भारतीय तीर्थयात्रियों के कई समूहों से भी संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई है।
चीन और नेपाल में बचाव अभियान तेज
तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में भी भूस्खलन के बाद 558 लोग लापता बताए गए हैं और तीन मौतों की पुष्टि हुई है। करीब 22 घंटे तक रास्ता बंद रहने के बाद चीनी बचाव दल ग्यिरोंग पोर्ट पहुंचा है। पहली टीम में 141 सदस्य हैं और हेलिकॉप्टर की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की जा रही है। नेपाल में सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 30 हेलिकॉप्टर बचाव कार्य के लिए तैनात किए हैं।
त्रिशूली-नारायणी से 64 शव बरामद
बाढ़ के बाद चितवन में त्रिशूली और नारायणी नदियों से 64 शव बरामद किए गए हैं। इनमें पूरे शवों के साथ शरीर के कुछ हिस्से भी शामिल हैं। शवों को भरतपुर अस्पताल के शवगृह में रखा गया है। उधर, बाढ़ के मलबे और कीचड़ के कारण कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नेपाल में जारी यह आपदा 2013 की केदारनाथ त्रासदी की भयावह यादें ताजा कर रही है। लगातार मलबे, पानी और भूस्खलन के खतरे के बीच हजारों परिवार अपनों की सलामती की खबर का इंतजार कर रहे हैं।


