डॉ. विजय गर्ग
सूरज निकलने से काफी पहले ही अनेक पक्षी अपनी मधुर आवाज़ में गाना शुरू कर देते हैं। प्रकृति की इस सुंदर घटना को ‘डॉन कोरस’ (Dawn Chorus) कहा जाता है। सुबह के समय पक्षियों का यह सामूहिक कलरव न केवल मन को आनंदित करता है, बल्कि उनके आपसी संवाद में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पक्षियों के सूर्योदय से पहले गाने का एक प्रमुख कारण साथी को आकर्षित करना और अपने क्षेत्र की पहचान स्थापित करना है। एक मजबूत और स्पष्ट गीत यह संकेत दे सकता है कि नर पक्षी स्वस्थ है और अपने क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम है। गीत के माध्यम से पक्षी अपनी प्रजाति के अन्य पक्षियों के साथ भी संवाद करते हैं।
सुबह का समय पक्षियों के लिए गाने का आदर्श समय होता है, क्योंकि उस समय वातावरण अपेक्षाकृत शांत और हवा ठंडी होती है। शांत वातावरण में उनकी आवाज़ अधिक प्रभावी ढंग से दूर तक पहुँच सकती है। इस समय यातायात, लोगों और अन्य मानवीय गतिविधियों का शोर भी बहुत कम होता है।
सुबह के शुरुआती समय में प्रकाश कम होने के कारण भी आवाज़ के माध्यम से संवाद करना उपयोगी होता है। भोजन की तलाश में सक्रिय होने से पहले पक्षी अपने गीतों के माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं, बिना अधिक दूर तक उड़ने की आवश्यकता के।
हर पक्षी एक ही समय पर गाना शुरू नहीं करता। अलग-अलग प्रजातियाँ अपने आवास, व्यवहार और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता के अनुसार अलग-अलग समय पर गाना शुरू करती हैं। कुछ पक्षी भोर की पहली रोशनी के संकेत मिलते ही गाने लगते हैं, जबकि कुछ अन्य थोड़ी देर बाद शुरुआत करते हैं।
इसलिए ‘डॉन कोरस’ केवल सुबह की मधुर आवाज़ नहीं है, बल्कि यह विकास की प्रक्रिया से बना पक्षियों का एक प्राकृतिक संचार तंत्र है। अगली बार जब सूर्योदय से पहले पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे, तो याद रखिए कि जब दुनिया का अधिकांश हिस्सा अभी सो रहा होता है, तब प्रकृति अपनी रोज़ाना की बातचीत शुरू कर चुकी होती है।
डॉ. विजय गर्ग
Academic Editor, Online Magazine FNBworld.com
मलोट, पंजाब


