फर्रुखाबाद। जिले में गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। रविवार सुबह तक गंगा नदी का जलस्तर स्थिर रहा, जबकि रामगंगा के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गंगा का पानी खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचने के कारण तटवर्ती और निचले इलाकों में लोगों की चिंता बनी हुई है। वहीं, प्रशासन ने कटान प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत कार्य तेज कर दिए हैं।
गंगा नदी का जलस्तर शनिवार रात से रविवार सुबह तक 137.05 मीटर पर स्थिर रहा। गंगा का खतरे का निशान 137.10 मीटर निर्धारित है। इस लिहाज से नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज 5 सेंटीमीटर नीचे बना हुआ है। नरौरा बांध से गंगा में 1,28,716 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इससे आने वाले समय में जलस्तर पर नजर रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
इधर, रामगंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शनिवार शाम को रामगंगा का जलस्तर 135.85 मीटर था, जो रविवार सुबह बढ़कर 135.95 मीटर पहुंच गया। यानी करीब 10 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। हालांकि रामगंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर है और वर्तमान जलस्तर इससे 65 सेंटीमीटर नीचे है।
बाढ़ कंट्रोल रूम के अनुसार रामगंगा में विभिन्न बैराजों से भी पानी छोड़ा जा रहा है। खो बैराज से 1,138 क्यूसेक, हरेली बैराज से 270 क्यूसेक तथा रामनगर बैराज से 2,612 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है। प्रशासन इन आंकड़ों के आधार पर नदियों के जलस्तर और संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहा है।
कटान प्रभावित गांवों में बचाव कार्य जारी
नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही तटवर्ती क्षेत्रों में कटान का खतरा भी बना हुआ है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर कटान रोकने के लिए बचाव कार्य कराया जा रहा है। ग्राम शेरपुर सराय के मजरा कुंडपुरा में कटान रोकने का कार्य जारी है। इसके साथ ही कटरी तौफीक क्षेत्र में भी नदी के कटान को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्य कराया जा रहा है।
प्रशासन की टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदी के जलस्तर में मामूली बदलाव के बावजूद तटवर्ती ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर और कटान की स्थिति के अनुसार बचाव कार्य को आगे भी जारी रखा जाएगा।


