बढ़ती कीमतों पर सरकार से 3 सवाल; 3 महीने में ₹19 महंगी, दाम 40% बढ़े
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की बढ़ती कीमतों और घरेलू स्टॉक में कमी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि त्योहारों से पहले देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और अब दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देश भारत को विदेश से चीनी आयात करने की जरूरत पड़ रही है।
खड़गे ने शनिवार को सोशल मीडिया पर सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि भारत में चीनी का भंडार नौ साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने 10 लाख टन चीनी शुल्क-मुक्त आयात करने के फैसले पर भी सवाल उठाया। खड़गे ने कहा कि एक ओर सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात करती है, वहीं दूसरी ओर विदेश से चीनी मंगाने की नौबत आ गई है।
देश के कई शहरों में चीनी के खुदरा दाम 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 19 रुपये प्रति किलो तक बढ़ी है। कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना शुल्क आयात करने की अनुमति दी है।
चीनी के साथ गुड़ के दाम भी तीन महीनों में करीब 24 प्रतिशत बढ़े हैं। इसी अवधि में चावल 16 प्रतिशत और मक्के का आटा करीब 11 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। मिलों के पास पुराने स्टॉक में कमी को भी चीनी की कीमत बढ़ने की प्रमुख वजह माना जा रहा है। पिछले सीजन में पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी थी, जो इस बार घटकर लगभग 32 लाख टन रह गई।
हालांकि केंद्र सरकार ने चीनी की महंगाई के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कीमत बढ़ने की प्रमुख वजह हैं।
सरकार के अनुसार 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48 रुपये प्रति किलो थी, जो बढ़कर 56 रुपये प्रति किलो हो गई है। एक्स-मिल कीमत भी कुछ ही दिनों में 47-48 रुपये से बढ़कर करीब 62 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
2025-26 में देश का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था। गन्ने की फसल में बीमारी और अधिक बारिश से उत्पादन प्रभावित हुआ है। सरकार का दावा है कि सितंबर 2026 के अंत तक 33-35 लाख टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध रहेगा।
सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर के मध्य से चीनी मिलों में नई पेराई शुरू होने के बाद बाजार में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी आएगी। इसके अलावा जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक सीमा भी लागू की गई है।


