हाई कोर्ट की सुनवाई पर अंतरिम रोक
नई दिल्ली। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 20 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय के आदेश के तहत की जा रही जांच से संबंधित कोई रिपोर्ट फिलहाल उच्च न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत न करें।
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि मामले की सुनवाई के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी न्यायालय को जांच या अन्य निर्देश जारी करने हैं तो संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी के पास उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक संपत्ति है। इसी शिकायत के आधार पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मई में कहा था कि आरोपों की सत्यता की जांच की जानी चाहिए। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय को कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी थी।
उच्च न्यायालय ने दोनों जांच एजेंसियों से जांच में हुई प्रगति की जानकारी भी मांगी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की ओर से पेश अतिरिक्त महान्यायवादी ने कहा कि इस मामले में अभी तक उनकी कोई भूमिका नहीं है।
इस पर न्यायमूर्ति ने सवाल किया कि यदि मामला इतना गंभीर है तो संबंधित जांच एजेंसी अब तक चुप क्यों रही और क्या उसने स्वयं कोई कार्रवाई शुरू की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कथित अपराध की जांच के लिए हर स्थिति में न्यायालय की अनुमति आवश्यक नहीं होती, लेकिन न्यायालय द्वारा कोई निर्देश जारी किए जाने पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उन्होंने शिकायतकर्ता पर राहुल गांधी को बदनाम करने के उद्देश्य से कई याचिकाएं दाखिल करने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। फिलहाल मामले में जांच से जुड़ी रिपोर्ट भी किसी प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जा सकेगी।


