लखनऊ। राजधानी में रूफटॉप सोलर लगवाने वाले बिजली उपभोक्ताओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सोलर पैनल से बिजली उत्पादन होने के बावजूद उसका समायोजन उपभोक्ता के बिजली बिल में नहीं हो रहा है। नेट मीटर में भी सोलर से बनी बिजली का सही हिसाब दिखाई नहीं दे रहा।
उपभोक्ताओं का कहना है कि रूफटॉप सोलर लगवाने का मुख्य उद्देश्य बिजली के बिल में कमी लाना और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उसका समायोजन प्राप्त करना है। लेकिन तकनीकी समस्या के चलते सोलर से बनने वाली बिजली का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को पहले की तरह अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है।
शिकायत के मुताबिक सोलर सिस्टम चालू होने के बावजूद नेट मीटर पर सोलर से उत्पन्न बिजली का अपेक्षित रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो रहा। इससे उपभोक्ता यह पता नहीं लगा पा रहे कि उनके सोलर सिस्टम ने कितनी बिजली पैदा की और कितनी बिजली ग्रिड में भेजी गई।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि समस्या की शिकायत संबंधित विभाग से किए जाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। इसके चलते रूफटॉप सोलर पर खर्च करने वाले उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
इसी समस्या को लेकर उपभोक्ता संख्या 9691649998 की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने सोलर उत्पादन और नेट मीटर में दर्ज होने वाली बिजली के आंकड़ों की जांच कराकर समस्या का तत्काल समाधान कराने की मांग की है।
मामले में सोलर मीटर, नेट मीटर, द्विदिशीय मीटर रीडिंग, बिजली विभाग के बिलिंग सिस्टम और सोलर प्लांट के उत्पादन आंकड़ों का मिलान किया जाना जरूरी है। यदि तकनीकी या बिलिंग स्तर पर गड़बड़ी है तो उसका समयबद्ध समाधान होना चाहिए, ताकि रूफटॉप सोलर लगवाने वाले उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ मिल सके।
रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि सोलर से पैदा होने वाली बिजली का मीटरिंग और बिलिंग सिस्टम पारदर्शी और तकनीकी रूप से दुरुस्त हो। तभी उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रहेगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकारी मुहिम को भी मजबूती मिलेगी।


