नई दिल्ली। देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 8 अगस्त का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 1942 में इसी दिन बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया गया था। अगले दिन 9 अगस्त से देशभर में इस आंदोलन ने व्यापक जनआंदोलन का रूप ले लिया। इसे इतिहास में ‘अगस्त क्रांति’ के नाम से भी जाना जाता है।
महात्मा गांधी ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का आह्वान करते हुए देशवासियों को ‘करो या मरो’ का मंत्र दिया। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों, युवाओं, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजी सरकार ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं और दमनात्मक कार्रवाई की, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों के हौसले कमजोर नहीं हुए। अनेक आंदोलनकारियों ने जेल यात्राएं कीं और कई ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन तक बलिदान कर दिया।
भारत छोड़ो आंदोलन केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह भारत की जनता की स्वतंत्रता की सामूहिक आकांक्षा और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध निर्णायक जनप्रतिरोध का प्रतीक बन गया। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब भारत की जनता विदेशी शासन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
आज भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों और आंदोलनकारियों को नमन किया जा रहा है, जिन्होंने मां भारती की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।


