मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवा पीढ़ी (जनरेशन-ज़ेड) के विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं से पहले संवाद होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन अपनी बात रखने का एक वैध और स्वीकार्य माध्यम है।
मोहन भागवत ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है और शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय बजट का कम से कम 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल विरोध करना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि विरोध के माध्यम से आम सहमति बनाना और समाधान तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण होता है।
सरसंघचालक ने कहा कि युवा पीढ़ी की शिकायतें काफी हद तक जायज़ हैं और उनकी बातों को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते युवाओं से संवाद किया जाता, तो कई परिस्थितियों को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता था।
मोहन भागवत ने युवाओं पर विश्वास जताते हुए कहा, “मुझे युवा पीढ़ी की ईमानदारी पर भरोसा है।” उन्होंने समाज और सरकार से युवाओं के विचारों को सम्मानपूर्वक सुनने तथा सकारात्मक संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने का आह्वान किया।


