नई दिल्ली। देशभर में लगातार हो रही मानसूनी बारिश अब तबाही का कारण बन गई है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। उत्तर प्रदेश में गंगा और सरयू समेत कई नदियां उफान पर हैं, जबकि उत्तराखंड में पहाड़ दरकने से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गए हैं।
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में गंगा का पानी 33 गांवों और 40 सरकारी स्कूलों में घुस गया है। बलिया में सरयू नदी के कटान से एक सप्ताह में 27 मकान नदी में समा चुके हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से 40 से 50 छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं। वहीं प्रतापगढ़ में लगातार बारिश के बीच 100 वर्ष पुराना मकान ढहने से एक ही परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते देहरादून, चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और पौड़ी गढ़वाल में आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर 12वीं तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। रुद्रप्रयाग के तिलवाड़ा क्षेत्र में पहाड़ से मलबा और चट्टानें गिरने से केदारनाथ हाईवे कई स्थानों पर बाधित हो गया, जबकि कई वाहन मलबे में दब गए। चमोली के हेलंग क्षेत्र में भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद हो गया है और सैकड़ों यात्री रास्ते में फंसे हुए हैं।
पूर्वोत्तर में असम की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। पिछले 24 घंटे में छह और लोगों की मौत के बाद इस मानसून में मृतकों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है। राज्य के 14 जिलों में हाई अलर्ट जारी है और 563 गांवों के 1.60 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
इस बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों तक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में तेज हवाओं, आकाशीय बिजली और अचानक बाढ़ की भी चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।


