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Saturday, May 2, 2026

जब ‘प्यार’ सरेआम तमाशा बन गया, तो इंसानियत भी हो गईं शर्मसार

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फर्रुखाबाद। सदर कोतवाली क्षेत्र के मुख्य बाजार में देर रात घटी एक घटना ने भीड़ तो खींची, लेकिन उससे ज्यादा बहस को जन्म दिया। एक युवक का बीच सड़क पर एक महिला के पैरों में गिर जाना और बार-बार मना करने के बावजूद लंबे समय तक वहीं पड़े रहना सिर्फ सनसनी नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवहार, सहमति और मर्यादा पर गंभीर सवाल है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महिला लगातार उसे हटने को कहती रही “हटो, पैर छोड़ो, सब देख रहे हैं”लेकिन युवक लगभग 20–30 मिनट तक जिद पर अड़ा रहा। भीड़ जुटती रही, लोग देखते रहे, कुछ ने समझाने की कोशिश की, और आखिरकार दोनों को अलग कराया गया। हैरानी की बात यह रही कि युवक सामान्य हालत में था,न नशा, न किसी तरह की कमजोरी फिर भी उसका व्यवहार असामान्य और जिद्दी था। थोड़ी देर बाद वह अपनी बाइक लेकर चला गया।
यहां असली मुद्दा “प्यार” नहीं, सहमति और सार्वजनिक शालीनता है। किसी भी रिश्ते में भावनाएं निजी होती हैं; उन्हें सड़क पर इस तरह थोपना, खासकर तब जब सामने वाला साफ मना कर रहा हो, गलत है। महिला द्वारा पहचान से इनकार करना भी बताता है कि मामला एकतरफा हो सकता है,और ऐसे में यह आचरण उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है।
कानूनी नजरिए से देखें तो सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का हंगामा, रास्ता बाधित करना या किसी को असहज और डराने वाली स्थिति में डालना, विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई योग्य हो सकता है। सवाल यह भी है कि भीड़ की भूमिका क्या रही,क्या सिर्फ तमाशा देखने से बेहतर हस्तक्षेप और मदद की संस्कृति विकसित नहीं होनी चाहिए?

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