वॉशिंग्टन: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह G7 ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए खाड़ी देशों पर हमले तुरंत रोकने को कहा है।
जी7 देशों ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी कर क्षेत्र में आम नागरिकों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। बयान में कहा गया कि इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।
इस बयान में ईरान को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि वह अपनी सैन्य गतिविधियों और प्रॉक्सी समूहों के जरिए किए जा रहे हमलों पर तुरंत रोक लगाए। जी7 ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खाड़ी देशों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
बयान पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इन देशों ने मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया है।
जी7 ने अपने बयान में खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र किया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिहाज से बेहद अहम समुद्री मार्ग है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।
बयान में यह भी कहा गया कि खाड़ी क्षेत्र के देशों जैसे बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और इराक पर हो रहे हमले अस्वीकार्य हैं और इनकी कड़े शब्दों में निंदा की जाती है।
जी7 देशों ने ईरान से अपील की कि वह न केवल हमले रोके, बल्कि क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाली अपनी गतिविधियों को भी समाप्त करे। साथ ही, उन्होंने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी चिंता जताई।
एक महत्वपूर्ण बिंदु के तौर पर, जी7 ने यह भी दोहराया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए। इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।
बयान में प्रभावित देशों के आत्मरक्षा के अधिकार का भी समर्थन किया गया। जी7 ने कहा कि जिन देशों पर हमले हो रहे हैं, उन्हें अपने नागरिकों और सीमाओं की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।
इसके अलावा, इराक में कूटनीतिक ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की भी आलोचना की गई। जी7 ने इन घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और इसे तुरंत रोकने की मांग की।
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच जी7 का यह रुख यह संकेत देता है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय दबाव और भी बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस चेतावनी पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्षेत्र में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।


