कमालगंज संवाददाता।
मौसम विभाग द्वारा 7 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक जनपद में आंधी-बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया था। इसी क्रम में बुधवार 8 अक्टूबर की रात्रि लगभग 9 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में घने काले बादल छा गए, तेज गड़गड़ाहट के साथ बिजलियां कड़कने लगीं और तेज हवाओं के साथ कई जगह बारिश शुरू हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कमालगंज थाना क्षेत्र के पूर्वी क्षेत्र के गांवों में इस दौरान ओलावृष्टि भी हुई। श्रृंगीरामपुर उर्फ सिंधीरामपुर, चौपरा, शेरपुर सराय सहित कई गांवों में कुछ देर तक बर्फ जैसे ओले गिरे, जिससे जमीन पर सफेद चादर बिछ गई। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक घटना में किसी भी प्रकार की जन-हानि की कोई खबर नहीं है।
रात्रि में हुई इस बारिश से आलू किसानों के चेहरों पर खुशी देखी गई। जिन किसानों ने आलू की बुवाई के लिए खेत तैयार किए थे, उनके लिए यह बारिश वरदान साबित हुई है। खेतों में नमी आने से जुताई और बुवाई में मदद मिलेगी।
वहीं दूसरी ओर पछेती धान की फसल करने वाले किसानों के लिए यह बारिश मुसीबत बन गई। तेज हवा के कारण पकी हुई धान की फसल खेतों में गिर गई और बालियां बारिश के पानी में भीग गईं। पहले से ही खेतों में पानी भरा होने से फसल के सड़ने-गलने और उत्पादन कम होने की चिंता बढ़ गई है। गुरुवार सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचे तो कई जगह फसल जमीन पर बिछी हुई मिली, जिससे कटाई में अब अधिक मेहनत और लागत आएगी।
चौपड़ा निवासी समर पाल यादव ने बताया कि “रात में वह बाहर चारपाई पर सो रहे थे। अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और जोर-जोर से बिजलियां कड़कने लगीं। जब तक वह अंदर गए, तब तक बारिश के साथ छोटे-छोटे ओले गिरने लगे। आनन-फानन में जानवरों को अंदर बांधना पड़ा।”
वहीं सबलपुर निवासी विपिन सिंह ने बताया कि “उनके 6 बीघा धान का खेत तेज हवा से पूरी तरह गिर गया है। धान पक कर कटाई के लिए बिल्कुल तैयार था। एक-दो दिन में कटाई शुरू होने वाली थी, लेकिन अब काफी नुकसान हो गया है।”
स्थानीय लोगों के अनुसार कमालगंज के पूर्वी दिशा के गांवों में पानी अधिक बरसा है, जबकि कमालगंज कस्बा सहित पश्चिमी क्षेत्र में बारिश कम हुई है और वहां ओले भी नहीं गिरे हैं।
किसानों ने प्रशासन से खेतों का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने की मांग की है।


