यूपी में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 241 प्रतिशत अधिक ईवी सब्सिडी के लिए आवेदन स्वीकृत हुए
प्रदेश में 2,316 चार्जिंग स्टेशन स्थापित, एक्सप्रेसवे से शहरों तक इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रहा विस्तार
ईवी को लेकर देश के अग्रणी राज्यों में पहचान बना रहा उत्तर प्रदेश
लखनऊ, 9 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 में पिछले वर्ष के मुकाबले 241 प्रतिशत अधिक ईवी सब्सिडी के लिए आवेदन स्वीकृत हुए। वहीं देशभर में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में यूपी की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत तक हो चुकी है, जिसे जल्द ही 30 प्रतिशत तक पहुंचाने की योजना है।
यूपी परिवहन विभाग द्वारा संचालित ईवी सब्सिडी योजना के तहत अब तक 86,489 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवेदन लाभ प्राप्त करने की श्रेणी स्वीकृत हो चुके हैं, जिसमें 43 हजार से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। लगातार बढ़ते पंजीकरण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और डिजिटल एवं पारदर्शी सब्सिडी वितरण व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी ईवी राज्यों में शामिल कर दिया है।
परिवहन विभाग के मुताबिक दोपहिया, चार पहिया, ई-बस और ई-गुड्स कैरियर (मालवाहक) की श्रेणी में 19 जुलाई 2023 से 31 मार्च 2024 के बीच 15,091 आवेदन स्वीकृत हुए थे। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में 13,950 आवेदन स्वीकृत हुए।
पिछले वित्तीय वर्ष में 241 प्रतिशत की वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 47,514 पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 241 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 से 22 जून 2026 तक केवल ढाई महीने से भी कम समय में 9,934 आवेदन स्वीकृत हुए। यह प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों का भरोसा और रुचि लगातार बढ़ने का प्रमाण है। वहीं सबसे अधिक मांग इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की रही है। अब तक 61,417 दोपहिया ईवी, 24,959 चारपहिया ईवी, 104 ई-गुड्स कैरियर और 9 ई-बसों के लिए सब्सिडी आवेदन स्वीकृत हुए हैं।
ईवी वाहनों में यूपी की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत
प्रदेश सरकार की ईवी नीति का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। नीति आयोग की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है। राज्य सरकार और विशेषज्ञों का अनुमान है कि नई सब्सिडी व्यवस्था (440 करोड़ रुपये) के प्रभाव से अगले दो वर्षों में यह हिस्सेदारी बढ़कर 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
अब तक 2,316 चार्जिंग स्टेशन स्थापित
यूपी में 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या हो चुकी है। ईवी को बढ़ावा देने के साथ योगी सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से कार्य कर रही है। पिछले 5 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 2,316 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनमें 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं।
नए चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का भी प्लान
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य में लगभग 38 हजार चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता होगी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश नवीकरणीय एवं ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (यूपीआरईवी) के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर एक्सप्रेसवे, प्रमुख शहरों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों व पर्यटन स्थलों पर नए चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हाईस्पीड चार्जर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
इस प्रक्रिया के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन करें
प्रदेश सरकार ने ईवी सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया है। 14 अक्टूबर 2022 से लागू उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 के अंतर्गत विकसित upevsubsidy.in पोर्टल के माध्यम से आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जा रही है।
1. पोर्टल पर ‘अप्लाई ऑनलाइन’ सेक्शन में जाकर आवेदक लॉगिन आईडी/पासवर्ड बनाएं।
2. वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करने पर वाहन पोर्टल से जुड़ी जानकारी स्वतः भर जाती है, शेष विवरण (बैंक खाता, आईएफएससी आदि) आवेदक को भरना होता है।
3. आधार कार्ड, पैन/जीएसटी (यदि लागू), बैंक पासबुक/कैंसिल चेक, वाहन की आरसी, मोबाइल नंबर व फोटो-हस्ताक्षर जैसे दस्तावेज अपलोड करने होते हैं।
4. आवेदन डीलर स्तर, पंजीकरण व विभागीय सत्यापन सहित बहुस्तरीय जांच से गुजरता है और अंतिम सत्यापन परिवहन निरीक्षक (टीआई) द्वारा किया जाता है।
5. नई व्यवस्था के तहत ई-बस को छोड़कर सभी प्रकार के आवेदनों का निस्तारण व भुगतान अब संबंधित आरटीओ कार्यालय से किया जा रहा है।
6. स्वीकृति के बाद सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है।
7. आवेदक वाहन नंबर व चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक डालकर पोर्टल पर आवेदन की स्थिति भी जांच सकते हैं।


