लखनऊ। पशुओं में फैलने वाली लंपी बीमारी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने निगरानी और रोकथाम के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। बीमारी फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पशुपालन विभाग को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगा दी गई है, जबकि पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह और राज्य मंत्री कृष्णा पासवान मंडलवार निरीक्षण कर जमीनी स्थिति का जायजा लेंगी।
सरकार ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों में मुख्यालय स्तर के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया है। ये अधिकारी मंगलवार से फील्ड में जाकर पशुओं की स्थिति, बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों और विभागीय व्यवस्थाओं की पड़ताल कर रहे हैं। नोडल अधिकारियों को 23 सितंबर तक क्षेत्र में रहकर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश कुमार मेश्राम ने सभी जिलाधिकारियों और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि पशुपालन मंत्री और राज्य मंत्री किसी भी दिन संबंधित मंडल का औचक निरीक्षण कर सकते हैं। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने क्षेत्र में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं पर नजर रखने को कहा गया है।
विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृत करने पर भी रोक लगा दी गई है। शासन के निर्देश के मुताबिक केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही शासन स्तर से अवकाश स्वीकृत कराया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य बीमारी की रोकथाम में किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न छोड़ना है।
मंडल स्तर पर तैनात नोडल अधिकारियों को गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति जानने के भी निर्देश दिए गए हैं। किसी ग्राम पंचायत का निरीक्षण करने के दौरान अधिकारी वहां कम से कम 10 पशुपालकों से सीधे बातचीत करेंगे। उनसे पशुओं में बीमारी के लक्षण, उपचार, टीकाकरण और विभागीय मदद की जानकारी ली जाएगी, ताकि जमीनी स्तर की स्थिति शासन तक पहुंच सके।
सरकार की ओर से अधिकारियों को बीमारी की निगरानी के साथ पशुपालकों को जागरूक करने, समय पर उपचार उपलब्ध कराने और किसी भी संदिग्ध मामले की तत्काल जानकारी लेने पर जोर दिया गया है। मंडलवार निरीक्षण और नोडल अधिकारियों की फील्ड मौजूदगी के जरिए सरकार बीमारी की स्थिति पर लगातार नजर रखेगी।


