लखनऊ। प्रदेश भाजपा संगठन में लंबे समय से चल रही इंतजार की घड़ी अब समाप्त होने के करीब है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 2 जून को नई प्रदेश कार्यकारिणी तथा क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों की घोषणा हो सकती है। चुनावी वर्ष को देखते हुए भाजपा नेतृत्व संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत कई पुराने चेहरों की जगह नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एक जून को दिल्ली में सभी प्रदेश अध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा होगी, वहीं उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन के पुनर्गठन पर भी अंतिम मंथन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह पिछले कई दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों में हिस्सा ले चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि बिहार भाजपा की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी व्यापक बदलाव की योजना बनाई जा रही है। पार्टी सामाजिक और जातीय समीकरणों के साथ-साथ युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन में सक्रिय सामाजिक चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि इसे लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।
भाजपा के छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन को लेकर भी मंथन जारी है। काशी क्षेत्र के अध्यक्ष पद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति मिलने की चर्चा है, जिसके बाद अन्य क्षेत्रों के जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा। हाल ही में वाराणसी जिले में राम सकल पटेल को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन में नए समीकरण उभरकर सामने आए हैं।
पार्टी नेतृत्व इस बार संगठन में उम्र, अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन पर विशेष ध्यान दे रहा है। ऐसे संकेत हैं कि कई वर्तमान पदाधिकारियों को संगठन से हटाकर निगमों, आयोगों और बोर्डों में समायोजित किया जा सकता है ताकि उनके अनुभव का लाभ पार्टी को मिलता रहे। इसी कारण अंतिम सूची तैयार करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
भाजपा के अंदर नई टीम को लेकर उत्सुकता चरम पर है। संगठन के पुराने और नए दावेदारों की निगाहें दिल्ली पर टिकी हुई हैं। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो यह हाल के वर्षों में भाजपा संगठन का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जाएगा, जिसका सीधा असर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर दिखाई देगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठनात्मक ढांचा ही आगामी चुनावी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।


