एटा
जिले में मौसम के अचानक बदलने के साथ ही वायरल बुखार का कहर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। इस बीमारी में लापरवाही करने वाले मरीजों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। बुधवार को जिले में 16 माह के छोटे बच्चे और 42 वर्षीय युवक की मौत ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज एटा की इमरजेंसी में बुधवार सुबह करीब 10 बजे शीतलपुर क्षेत्र के गांव नगला सेमरा से 16 माह के दिव्यम को परिजन लाए। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, दिव्यम को पिछले तीन दिनों से बुखार था और पहले से ही शहर के एक निजी क्लीनिक में उसका उपचार चल रहा था। हालांकि, बुधवार सुबह अचानक उसकी स्थिति बिगड़ गई, और क्लीनिक के चिकित्सकों ने उसे दूसरी जगह इलाज के लिए भेजने की सलाह दी। परिजन बच्चे को तुरंत मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी लेकर पहुंचे, लेकिन वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
वहीं, मंगलवार की शाम करीब 7 बजे बारथर निवासी 42 वर्षीय यतेंद्र सिंह को भी गंभीर हालत में परिजन लेकर आए। चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया। यतेंद्र की मौत किडनी खराब होने से हुई, और माना जा रहा है कि वायरल बुखार और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं ने स्थिति और बिगाड़ दी।
इन घटनाओं ने जिले में स्वास्थ्य जागरूकता और प्राथमिक चिकित्सा की कमी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौसम बदलने पर वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है, लेकिन समय पर उचित इलाज न मिलने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बुखार, खांसी या अन्य वायरल लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा में कोई कमी न छोड़ें।


