न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का श्रेय अमेरिका को दिया। मंगलवार को 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि राष्ट्रपति बनने के बाद से उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए हैं। भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ‘फैंटास्टिक मैन’ बताया।
ट्रंप लंबे समय से भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने में अपनी भूमिका का दावा करते रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से लगातार यह स्पष्ट किया गया है कि संघर्ष विराम किसी तीसरे देश की मध्यस्थता के कारण नहीं हुआ। संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर उनकी टिप्पणियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिका की सैन्य और आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि दूसरे नेता शांति की बातें करते रहे, जबकि उन्होंने कार्रवाई कर शांति कायम की। उन्होंने ईरान को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अमेरिका के सामने उसके साथ समझौता करने या उसे खत्म करने के विकल्प हैं। ट्रंप ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से सहयोग की अपील भी की।
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली और फंडिंग को लेकर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग में कटौती की है, जिसका असर उसके कामकाज और कर्मचारियों पर पड़ा। इसके अलावा उन्होंने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने, क्यूबा की सरकार के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को लेकर भी अपनी बात रखी।
ट्रंप के बाद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने पश्चिम एशिया के संघर्ष के वैश्विक प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि मध्य पूर्व की जंग का असर केवल उसी क्षेत्र तक सीमित रहता है। उन्होंने कहा कि इसके प्रभाव को मुंबई से लेकर अमेरिका के मिनिसोटा तक आम लोगों के बिजली और खाने के बिलों में देखा जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने महासचिव के तौर पर अपना आखिरी महासभा संबोधन दिया। उन्होंने दुनिया में बढ़ती दूरियों और मजबूत संयुक्त राष्ट्र की जरूरत पर जोर दिया। 81वीं महासभा में आतंकवाद, पश्चिम एशिया का संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक दक्षिण की चुनौतियां और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से चर्चा में हैं।


