कंपिल:
ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरी कंपिल में करीब एक शताब्दी से चली आ रही रामलीला की परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचारों से व्यथित पृथ्वी की भगवान से सहायता की गुहार, रावण-कुंभकरण के जन्म और माता सीता के प्राकट्य के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। श्री रामलीला मंचन स्थल पर मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों ने अपने प्रभावी अभिनय से पौराणिक कथाओं को साकार किया। मंचन के दौरान जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
कंपिल की पहचान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगरी के रूप में रही है। इसी प्राचीन परंपरा से जुड़ी रामलीला में गुरुवार रात मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों श्याम पाठक, लेखराज पाठक सहित अन्य कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया। पृथ्वी पुकार के दृश्य में बढ़ते अत्याचारों से व्यथित पृथ्वी को भगवान से सहायता मांगते दिखाया गया। इसके बाद रावण और कुंभकरण के जन्म की कथा प्रस्तुत की गई। रावण के जन्म और आगे चलकर उसके शक्तिशाली बनने की कथा के साथ कुंभकरण के जन्म का दृश्य भी प्रभावी रहा। इसके बाद माता सीता के प्राकट्य का मनोहारी प्रसंग प्रस्तुत किया गया। सीता जन्म के दौरान वातावरण भक्तिमय हो गया। आकाशवाणी के दृश्य ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाई। कलाकारों के संवाद, संगीत और प्रकाश व्यवस्था ने मंचन को आकर्षक बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैदान में मौजूद रहे।
रामलीला महोत्सव की व्यवस्था में अध्यक्ष नीरज कुमार पांडेय, मुख्य प्रबंधक ऋषभ गुप्ता, महामंत्री आयेंन्द्र सिंह यादव, कोषाध्यक्ष राघव चंद्र शुक्ला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदेश वर्मा, नितिन मिश्रा, मीडिया प्रभारी ओम शक्ति सैनी, संयोजक उपेंद्र सिंह उर्फ रवि वर्मा, संयुक्त महामंत्री महेंद्र प्रजापति, उपाध्यक्ष राजेश कठेरिया, रामेत वर्मा, रजनेश राजपूत, गुड्डन सक्सेना, सुरेंद्र सैनी सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।


