शमशाबाद सीएचसी के मुख्य गेट पर जुटीं 70 से अधिक आशा और संगिनी कार्यकर्ता, टीकाकरण कक्ष का ताला नहीं खुलने दिया; मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
फर्रुखाबाद शमशाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के मुख्य गेट पर आशा बहुओं और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं का धरना-प्रदर्शन लगातार 10वें दिन भी जारी रहा। मानदेय बढ़ाने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और अन्य समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर कार्यकर्ता 1 अक्टूबर से आंदोलन कर रही हैं। शुक्रवार को 70 से अधिक आशा एवं संगिनी कार्यकर्ताओं ने सीएचसी परिसर में दरी बिछाकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
आंदोलन के दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने शीत श्रृंखला यानी टीकाकरण कक्ष का ताला नहीं खुलने दिया। उन्होंने कार्य बहिष्कार का ऐलान करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं किया जाता, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में सहयोग नहीं करने की चेतावनी भी दी। टीकाकरण कक्ष बंद रहने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ऑल आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ता संगठन की शमशाबाद इकाई के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में सुबह से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सीएचसी के मुख्य गेट पर एकत्र हो गईं। धरने के दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। “एक कटोरी दो समोसा, मोदी तेरा क्या भरोसा”, “अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे बहुत लड़ाई है” और “नारी बनी ज्वाला” जैसे नारों से सीएचसी परिसर गूंज उठा।
धरने पर बैठी आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे दिन-रात स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टीकाकरण, प्रसव संबंधी सेवाओं, सर्वेक्षण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में उनका योगदान रहता है। इसके बावजूद उन्हें काम के अनुरूप मानदेय और जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसी को लेकर लंबे समय से मांगें उठाई जा रही हैं।
आशा कार्यकर्ताओं ने अपना मासिक मानदेय बढ़ाकर 21 हजार रुपये और आशा संगिनी का मानदेय 26 हजार रुपये करने की मांग की। इसके साथ ही आशा एवं संगिनी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और सभी जनपदों में निर्धारित बजट के तहत मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
कार्यकर्ताओं की अन्य मांगों में आशा एवं संगिनी तथा उनके परिवार को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है। उनका कहना है कि संगिनी का कार्यक्षेत्र बड़ा होने के कारण उन्हें भ्रमण के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटी दी जानी चाहिए। इसके अलावा कामकाज के लिए मोबाइल फोन, समुचित प्रशिक्षण, बीमा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
धरने में ब्लॉक अध्यक्ष दया देवी के साथ मीना, प्रीति, गीता, शबनम, प्रवीण, विनीता, मंजू, संगीता, मधु, छोटी, बिटिया, रीना, कोकिला, मालती, रेनू, मनीषा, संतोषी, किरण, कमलेश, सुनीता, रचना, धनदेवी, रूपेश, सुषमा, श्यामा देवी, गुड्डी देवी, मुन्नी, प्रेमलता, सावित्री, रुबिया, रेखा, कंचन, अंजली, शीला, रूबी, लक्ष्मी, फूलवती, सुमनलता, सरलावती, मेराज फातिमा और नीलम सहित 70 से अधिक आशा एवं संगिनी कार्यकर्ता मौजूद रहीं। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि मांगों पर समाधान होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


