शमसाबाद, फर्रुखाबाद। गंगा नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर और पानी छोड़े जाने के चलते ढाईघाट शमसाबाद क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। गंगा की कटरी में बसे करीब दो दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। चारों ओर जलसैलाब दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। बाढ़ के चलते लोगों के सामने समस्याओं का अंबार लगा हुआ है और लंबे समय से जारी जल त्रासदी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
बाढ़ का पानी गांवों में दाखिल होने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कई स्थानों पर रास्ते जलमग्न होने के कारण आवागमन बाधित है। लोगों को जरूरी सामान जुटाने के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में पानी भर जाने से परिवारों के सामने रहने और भोजन-पानी की समस्या खड़ी हो गई है। अनेक ग्रामीण अपने परिवार और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को विवश हैं।
पशुओं के चारे का भी संकट
बाढ़ की मार केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुधन भी इसकी चपेट में है। चारों ओर पानी भरा होने के कारण पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि घर और खेत जलमग्न होने के कारण पहले से ही परेशानी बढ़ी हुई है, वहीं पशुओं को सुरक्षित रखने और उनके लिए चारा जुटाने की चुनौती भी सामने है।
महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी
जलभराव के चलते ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। शौच के लिए लोगों को ऊंचे स्थानों अथवा सड़क किनारे जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं, युवतियों और छोटे बच्चों को इससे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के बीच सुरक्षित तरीके से आवागमन करना मुश्किल है और कई जगह रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं।
बाढ़ के पानी और कटान के कारण कच्चे-पक्के मकानों के साथ ही झुग्गी-झोपड़ियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई ग्रामीणों को अपने आशियाने की सुरक्षा की चिंता सता रही है। कटान बढ़ने की स्थिति में लोगों को मकान और सामान बचाना भी मुश्किल हो रहा है।
महीनों से बाढ़ की मार, अब घर लौटने का इंतजार
लंबे समय से बाढ़ की स्थिति झेल रहे ग्रामीणों में अब मायूसी साफ दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अब उन्हें सिर्फ इस बात का इंतजार है कि आखिर कब गंगा का पानी कम होगा और वह अपने घरों में वापस लौट सकेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय ही अपने और पराये की पहचान होती है। जो व्यक्ति संकट की घड़ी में साथ खड़ा होकर मदद करता है, वही वास्तव में अपना होता है।
चुनाव के समय दिखने वाले जनप्रतिनिधि संकट में नदारद होने का आरोप
ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों को लेकर भी नाराजगी दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान गांव-गांव पहुंचने वाले अधिकांश जनप्रतिनिधि इस संकट की घड़ी में दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव की नजदीकियों के बावजूद बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर अधिकांश जनप्रतिनिधियों की खामोशी ग्रामीणों को खल रही है।
हालांकि कुछ समाजसेवी और जनप्रतिनिधि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय होकर लोगों की मदद कर रहे हैं। इसी क्रम में समाजसेवी सुरजीत गंगवार अपनी टीम के साथ लगातार प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को सूखा राशन, पेयजल और अन्य राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं। उनके द्वारा बाढ़ पीड़ित परिवारों की जरूरतों को देखते हुए राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रशासनिक टीमें राहत में जुटीं
दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। प्रभावित ग्रामीणों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मदद मिल रही है, लेकिन बाढ़ का दायरा बढ़ने के कारण राहत और बचाव कार्य को और तेज करने की जरूरत है।
गंगा की कटरी में बाढ़ की विभीषिका, दो दर्जन गांव जलमग्न


