36 C
Lucknow
Thursday, May 14, 2026

191 करोड़ के गंगा सेतु पर डीएम का छापा-जैसा निरीक्षण, कटान और गुणवत्ता पर अफसरों की ली क्लास

Must read

हरदोई-कमालगंज मार्ग परियोजना पर सख्त हुए डीएम डॉ. अंकुर लाठर, बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं

फर्रुखाबाद।
जनपद की बहुप्रतीक्षित हरदोई-कमालगंज मार्ग गंगा सेतु परियोजना अब प्रशासनिक निगरानी के केंद्र में आ गई है। करीब 191.13 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी सेतु और पहुंच मार्ग के निर्माण कार्यों का बुधवार को जिलाधिकारी Dr. Ankur Lather ने अचानक स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों में हड़कंप जैसी स्थिति दिखाई दी।

डीएम ने निर्माणाधीन गंगा पुल, पहुंच मार्ग और नदी किनारे कराए जा रहे सुरक्षात्मक कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। खास तौर पर संभावित कटान वाले क्षेत्रों पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई और अधिकारियों से अब तक किए गए सुरक्षा उपायों की पूरी रिपोर्ट मौके पर ही मांगी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गंगा किनारे कराई जा रही पिचिंग का भौतिक सत्यापन भी किया। सूत्रों के मुताबिक डीएम ने गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर मानकों से समझौता हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई तय मानी जाए।

उत्तर प्रदेश स्टेट ब्रिज कारपोरेशन और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों को निर्देश देते हुए डीएम ने कहा कि यह परियोजना सिर्फ पुल निर्माण नहीं बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और आवागमन से जुड़ा बड़ा जनहित कार्य है। इसलिए निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए।
जानकारों के मुताबिक यह गंगा सेतु बनने के बाद हरदोई और फर्रुखाबाद के बीच आवागमन बेहद आसान हो जाएगा। व्यापार, कृषि परिवहन और स्थानीय कनेक्टिविटी को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि बरसात से पहले कटान और सुरक्षा कार्यों को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सतर्क दिखाई दे रहा है।
डीएम ने अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश देते हुए कहा कि कटान प्रभावित इलाकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से कार्य की प्रगति रिपोर्ट लगातार उपलब्ध कराने को भी कहा।
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी, सेतु निगम, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे। अब इस हाईप्रोफाइल परियोजना पर प्रशासन की सख्ती के बाद निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article