शाहजहांपुर। शहर को दशकों तक जोड़ने वाला गर्रा नदी पर बना 112 साल पुराना लोहे का ऐतिहासिक पुल अब अपने अंतिम समय में है। वर्ष 1914 में अंग्रेजों के शासनकाल में तैयार हुआ यह पुल अपने दौर की बेहतरीन इंजीनियरिंग का नमूना माना जाता था, लेकिन अब इसे जर्जर हालत के चलते तोड़ा जा रहा है। यह पुल सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि शहर की पहचान और इतिहास का अहम हिस्सा रहा है। लोहे के मजबूत ढांचे से बना यह पुल करीब एक सदी से अधिक समय तक लोगों की आवाजाही का मुख्य साधन बना रहा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पुल उस दौर की ईमानदारी और गुणवत्ता की मिसाल था, जब निर्माण कार्य लंबे समय तक टिकाऊ होते थे। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत कराई जाती, तो यह पुल अभी भी 10 से 20 साल तक और उपयोग में लाया जा सकता था। कई नागरिकों का मानना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि पुल की स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे हटाने का निर्णय लिया गया है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। इसके स्थान पर नए पुल के निर्माण की योजना पर काम किया जा रहा है।
अब यह पुल सिर्फ यादों में ही रह जाएगा, लेकिन यह सवाल जरूर छोड़ गया है कि क्या हम अपनी ऐतिहासिक विरासत को सहेजने में कहीं पीछे तो नहीं रह गए?


