लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लागू हुई नई आबकारी नीति के तहत शराब की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं को सीधा झटका दिया है। नए वित्तीय वर्ष के साथ लागू इस नीति में सरकार ने राजस्व बढ़ाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कई बदलाव किए हैं, लेकिन इसका असर सीधे जेब पर पड़ रहा है।
कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ा बोझ
नई नीति के तहत देशी और अंग्रेजी दोनों तरह की शराब की कीमतों में इजाफा किया गया है। विभिन्न ब्रांड्स पर अलग-अलग दरों से कीमतें बढ़ाई गई हैं, जिससे शराब खरीदने वालों को अब पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। खासतौर पर प्रीमियम ब्रांड्स में बढ़ोतरी ज्यादा देखने को मिल रही है।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अवैध शराब पर रोक लगाना, लाइसेंस प्रणाली को सुदृढ़ करना और राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है। आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नई नीति से पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर लगाम लगेगी।
ठेकों की व्यवस्था में भी बदलाव
नई आबकारी नीति में शराब दुकानों के आवंटन, नवीनीकरण और संचालन से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया गया है। इससे ठेकेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होगा।
कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर शराब उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि पहले ही महंगाई से लोग परेशान हैं, ऐसे में शराब के दाम बढ़ना अतिरिक्त बोझ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में बढ़ोतरी से खपत पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन राजस्व के लिहाज से सरकार को फायदा होने की संभावना है। साथ ही, यह भी देखने वाली बात होगी कि अवैध शराब के कारोबार पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
यूपी में नई आबकारी नीति: शराब हुई महंगी, शौकीनों को बड़ा झटका


