नई दिल्ली। नल्सर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई ) के कदम पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी आपत्ति जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीसीआई की दखलअंदाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह “मेरे और छात्रों के बीच संवाद है, बीसीआई इसमें हस्तक्षेप करने वाला कौन है?” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र गलत भी हों, तब भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।
मामला उस समय गरमाया जब बीसीआई ने नल्सर के 2026 बैच के सभी कानून स्नातकों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। यह कार्रवाई उन छात्रों की ओर से सीजेआई सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध में चलाए गए अभियान के बाद हुई थी। बाद में बीसीआई ने अपना आदेश वापस ले लिया और छात्रों को राहत दी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में बीसीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि बीसीआई या किसी राज्य बार काउंसिल की ओर से नल्सर के छात्रों अथवा फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को कानून के छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि किसी छात्र के विचार या विरोध से असहमति होने मात्र से उसके पेशेवर भविष्य पर सामूहिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
बीसीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित सर्कुलर वापस ले लिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद बीसीआई को अपनी कार्रवाई और उसके आधार के संबंध में जवाब देना होगा।


