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Tuesday, April 21, 2026

दिल्ली में वाहन प्रदूषण पर सख्ती, CAG रिपोर्ट के बाद विधानसभा सचिवालय ने दिए सख्त निर्देश

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नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) की सबसे गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों में शामिल वाहन जनित वायु प्रदूषण को लेकर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने इस मुद्दे पर कार्रवाई तेज करते हुए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर बड़ी पहल की है। वाहन जनित वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण पर किए गए प्रदर्शन ऑडिट के निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए लोक लेखा समिति (PAC) की तीसरी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। सभी संबंधित विभागों को CAG की सिफारिशों पर कार्रवाई करनी होगी। 31 दिसंबर 2026 तक सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। पूरी कार्रवाई रिपोर्ट 31 जनवरी 2027 तक विधानसभा सचिवालय को सौंपनी होगी।

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थागत प्रक्रियाओं को केवल रिपोर्ट तक सीमित न रखते हुए, ऑडिट के निष्कर्षों को जमीनी स्तर पर ठोस परिणामों में बदलना चाहिए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का वास्तविक असर दिख सके। इसी दिशा में दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने परिवहन मंत्री, दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग के सचिव-सह-आयुक्त को पत्र भेजा है। इसमें लोक लेखा समिति (PAC) की सिफारिशों पर व्यापक और समयबद्ध प्रतिक्रिया देने का अनुरोध किया गया है।

दिल्ली में वाहन जनित वायु प्रदूषण को लेकर सामने आई कैग (CAG) आधारित समीक्षा रिपोर्ट ने शहर की वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में नियामक ढांचे, प्रवर्तन तंत्र और संस्थागत समन्वय में मौजूद कई खामियों को उजागर किया गया है, जो प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावित कर रही हैं। दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा लोक लेखा समिति की सिफारिशों को आगे बढ़ाते हुए यह रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार राजधानी की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था में कई संरचनात्मक कमियां हैं, जैसे योजना निर्माण में स्पष्ट कमी निगरानी प्रणाली की सीमित क्षमता प्रवर्तन (enforcement) में असंतुलन वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की अपर्याप्त स्थापना और संचालन कई प्रदूषकों की अधूरी निगरानी विश्वसनीय उत्सर्जन डेटा की कमी इन कारणों से साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (evidence-based policymaking) प्रभावित हो रहा है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की प्रदूषण के प्रति प्रतिक्रिया केवल छोटे-छोटे उपायों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह समस्या संरचनात्मक स्तर की है और इसके समाधान के लिए व्यापक व समन्वित रणनीति जरूरी है।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि राजधानी की बस और समग्र सार्वजनिक परिवहन प्रणाली लंबे समय से कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की कमियों की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि बसों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, रूट कवरेज सीमित है और लास्ट माइल कनेक्टिविटी कमजोर बनी हुई है।

इसके अलावा रूट रेशनलाइजेशन में देरी और वैकल्पिक परिवहन प्रणालियों के धीमे क्रियान्वयन को भी उन्होंने प्रमुख समस्याओं के रूप में रेखांकित किया। इन कमियों के कारण नागरिकों की निर्भरता निजी वाहनों पर लगातार बढ़ रही है, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव और अधिक बढ़ रहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि इसी प्रवृत्ति का सीधा असर वायु प्रदूषण में वृद्धि के रूप में भी देखा जा रहा है, जो राजधानी के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

 

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