**विद्यार्थियों ने कला, साहित्य, संगीत और भारतीय संस्कृति की प्रस्तुतियों से मोहा मन**
फतेहगढ़ कैंट, 17 अक्टूबर। आर्मी पब्लिक स्कूल, फतेहगढ़ कैंट में ‘सृजन’ नाम से भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन सिखलाई रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट एवं विद्यालय के अध्यक्ष ब्रिगेडियर मनीष कुमार जैन ने किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा, कलात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक ज्ञान का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी में हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत विषयों से संबंधित विभिन्न मॉडलों एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक घटनाओं, साहित्यिक विषयों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता और विषयों को रोचक ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता ने आगंतुकों को प्रभावित किया।
कला प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए आकर्षक चित्रों और रंगीन पेंटिंग्स की अभिभावकों तथा सैन्य अधिकारियों ने सराहना की। वहीं, संगीत कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों के लोकगीतों और लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक पेश की।
हिंदी और अंग्रेजी विषयों की प्रदर्शनी में विषय आधारित मॉडलों के साथ नाट्य कला का भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। संस्कृत प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न मॉडलों के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को दर्शाया। प्राचीन शिक्षा पद्धति गुरुकुल व्यवस्था के सजीव दृश्य ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और प्राचीन शिक्षा व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान मेजर राकेश राघव, मेजर सी.आई. सिंह सहित अनेक सैन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और प्रस्तुतीकरण की सराहना की। साथ ही विद्यालय की प्रधानाचार्या सोनिया शर्मा और उपप्रधानाचार्य नितिन चतुर्वेदी को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
‘सृजन’ प्रदर्शनी विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ उनमें रचनात्मक सोच, भाषा कौशल, कलात्मक अभिव्यक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि विकसित करने का सराहनीय माध्यम बनी।


