आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से 24 घंटे में मांगा जवाब
लखनऊ। प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त कर दी है। हालांकि, इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कॉरपोरेशन से 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है।
दरअसल, स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बाद उपभोक्ता परिषद ने आयोग में याचिका दाखिल की थी। आयोग ने 16 अप्रैल को पावर कॉरपोरेशन को 10 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए अब अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने का आदेश जारी किया है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि बिना उपभोक्ताओं की सहमति के पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड में बदला गया और नए कनेक्शन भी अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में दिए गए, जो नियमों के खिलाफ है।
आयोग ने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया तो पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश में बिजली व्यवस्था और उपभोक्ता हितों को लेकर प्रशासनिक सख्ती बढ़ती नजर आ रही है।


