खेतों में खड़ा चारा पानी में डूबा, पशुओं का पेट भरना बना बड़ी चुनौती; बाढ़ के पानी में ही चारा खाने को मजबूर हैं मवेशी
करनपुर घाट के ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हरे चारे की व्यवस्था कराने की उठाई मांग
अमृतपुर
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ ने जहां ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी का संकट खड़ा कर दिया है, वहीं अब पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। थाना क्षेत्र के गांव करनपुर घाट में खेतों में खड़ा हरा चारा बाढ़ के पानी में डूबने से पशुपालकों के सामने मवेशियों का पेट भरने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालात यह हैं कि ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे कटरी क्षेत्र में पहुंच रहे हैं और वहां से नरकुल काटकर नाव में लाकर किसी तरह पशुओं के लिए चारे का इंतजाम कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पानी भरा रहने के कारण खेतों में मौजूद हरा चारा खराब हो चुका है। गांव के आसपास भी चारे का कोई पर्याप्त साधन नहीं बचा है। ऐसे में पशुपालकों को नाव लेकर बाढ़ के पानी के बीच कटरी क्षेत्र तक जाना पड़ रहा है। वहां से नरकुल काटकर नाव में भरने के बाद उसे गांव लाया जाता है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी घरों और पशुओं के आसपास तक भरा होने के कारण मवेशियों को पानी के बीच ही चारा खिलाने की मजबूरी बनी हुई है।पशुओं के लिए चारा जुटाना ग्रामीणों के लिए आसान नहीं है। बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में नाव चलाकर नरकुल काटना जोखिम भरा है। इसके बावजूद पशुपालक अपने मवेशियों का पेट भरने के लिए मजबूरी में यह कदम उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से जल्द चारे की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।ग्रामीणों के मुताबिक पानी में लगातार रहने और गीला चारा खाने से पशुओं के बीमार पड़ने का खतरा भी बना हुआ है। पहले ही बाढ़ के कारण पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखना मुश्किल हो रहा है और अब चारे का संकट उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है।
ग्रामीण रामनरेश, शिवधारा, दीनदयाल, हरिशरण, प्रभुदयाल, प्रभुशरण, कर्मवीर, दिनेश, रामबेटी और करिश्मा आदि ने बताया कि लंबे समय से खेतों में पानी भरा होने के कारण हरा चारा खराब हो चुका है। बाढ़ का पानी बढ़ने से पहले ही चारे की समस्या शुरू हो गई थी, लेकिन अब हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों के लिए राहत सामग्री के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी बेहद जरूरी है। बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं और मवेशियों को चारा उपलब्ध न होने से उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित करनपुर घाट और आसपास के गांवों में पशुओं के लिए तत्काल हरे चारे, भूसे और आवश्यक पशु आहार की व्यवस्था कराई जाए, ताकि बाढ़ के बीच ग्रामीणों को अपने पशुओं का पेट भरने के लिए जान जोखिम में डालकर नाव से चारा लाने को मजबूर न होना पड़े।बाढ़ ने छीन लिया खेतों का चारा, अब नाव बनी पशुपालकों की मजबूरी—मवेशियों के पेट के लिए पानी के बीच जद्दोजहद जारी है।


