राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा तेज, समयबद्ध निस्तारण और जवाबदेही पर जोर
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने के बाद फर्रुखाबाद में भी राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रशासनिक निगरानी और सख्त हो गई है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली में भी राजस्व मामलों को केवल आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय उनके वास्तविक निस्तारण और आम नागरिक को राहत मिलने पर जोर दिखाई देता है।
राजस्व से जुड़े विवाद सीधे आम लोगों की जमीन, विरासत, नामांतरण, पैमाइश और अन्य अधिकारों से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी नागरिक के लिए वर्षों की परेशानी का कारण बन सकती है। यही वजह है कि लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।
राजस्व मामलों में तेजी का अर्थ केवल अधिक संख्या में फाइलें निपटाना नहीं होना चाहिए। महत्वपूर्ण यह है कि प्रत्येक मामले की सुनवाई नियमानुसार हो, पक्षकारों को उचित अवसर मिले और आदेश न्यायसंगत एवं स्पष्ट हो।
डीएम डॉ. अंकुर लाठर की प्रशासनिक दृष्टि में काम की गति के साथ उसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण है। इससे राजस्व न्यायालयों में अनावश्यक लंबित मामलों को कम करने के साथ जनता का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
राजस्व व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी तहसील स्तर पर होती है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, पुराने मामलों की पहचान और उनके निस्तारण की समयबद्ध निगरानी से व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है।
प्रशासन के सामने चुनौती यह भी है कि पुराने मामलों के साथ-साथ नए मामलों का बोझ बढ़ने न दिया जाए। इसके लिए निस्तारण की गति, लंबित मामलों की आयु और विभागवार स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है।


