शमसाबाद, फर्रुखाबाद। आलू की बुवाई का दौर शुरू होते ही शमसाबाद क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक ओर तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश और जलभराव के कारण खेती की तैयारियां पहले ही प्रभावित हुई हैं, वहीं अब डीएपी खाद की कथित किल्लत ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि सरकारी सहकारी समितियों से लेकर निजी खाद विक्रेताओं तक के यहां डीएपी आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है, जिसके चलते उन्हें खाद के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भटकना पड़ रहा है।
सितंबर माह के अंतिम सप्ताह से ही क्षेत्र के किसान आलू की बुवाई की तैयारियों में जुट जाते हैं। खेतों की जुताई-मड़ाई के साथ शीतगृहों से आलू निकालने का काम भी तेज हो जाता है। इस बार लगातार हुई तीन दिवसीय बारिश और खेतों में जलभराव के कारण किसानों की तैयारियां पहले ही पिछड़ चुकी हैं। मौसम साफ होने के बाद किसानों ने दोबारा खेतों को बुवाई के लिए तैयार करना शुरू किया, लेकिन अब खाद की उपलब्धता का संकट सामने आने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिली तो आलू की बुवाई और आगे खिसक सकती है।
किसानों राकेश कुमार, सीताराम, सुशील, संजीब, रामबीर और राजन आदि का कहना है कि आलू की बुवाई से पहले खेत की उर्वरक क्षमता बनाए रखना जरूरी होता है। किसान गोबर और अन्य जैविक खाद का भी प्रयोग करते हैं, लेकिन फसल की जरूरत के अनुसार डीएपी समेत अन्य रासायनिक उर्वरकों की भी आवश्यकता पड़ती है। किसानों के मुताबिक खाद समय पर उपलब्ध नहीं हुई तो बुवाई प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। पहले से बारिश के कारण खेती का काम पीछे चल रहा है, ऐसे में खाद की समस्या किसानों के लिए दोहरी परेशानी बन गई है।
गुरुवार को शमसाबाद नगर और आसपास के कई सरकारी व निजी खाद केंद्रों पर किसान डीएपी की तलाश में भटकते नजर आए। किसानों ने आरोप लगाया कि आलू की बुवाई का सीजन शुरू होते ही खाद की किल्लत पैदा हो गई है। उनका आरोप है कि कुछ विक्रेता खाद को खुले तौर पर उपलब्ध कराने के बजाय स्टॉक छिपाकर रखते हैं और बाद में कथित तौर पर मनमाने दामों पर बिक्री करते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसानों ने प्रशासन से खाद की उपलब्धता की जांच कराने और निर्धारित दरों पर बिक्री सुनिश्चित कराने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि समय पर आलू की बुवाई होने पर वे एक कृषि सीजन में दूसरी फसल की तैयारी भी कर लेते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलता है। इस वर्ष प्राकृतिक आपदा के कारण खेती का कार्यक्रम पहले ही प्रभावित हुआ है और अब खाद की उपलब्धता की समस्या सामने आने से बुवाई में और देरी होने की आशंका है। किसानों के अनुसार यदि समय पर खाद और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध नहीं हुई तो इसका सीधा असर खेती की लागत, बुवाई के समय और उत्पादन पर पड़ सकता है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला महासचिव संजय गंगवार ने बताया कि खाद की समस्या को लेकर पूर्व में समिति अध्यक्ष से वार्ता कर समस्या के समाधान की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद किसानों के अनुसार स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के सरकारी खाद केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में डीएपी और अन्य उर्वरकों की तत्काल आपूर्ति कराई जाए। साथ ही खाद की कथित कालाबाजारी और निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके और आलू की बुवाई प्रभावित न हो।


