– फोटोग्राफी के क्षेत्र में बनाई अलग पहचान
– अब पुलिस, सेना और सरकारी विभागों को भी दे रहे प्रशिक्षण
फर्रुखाबाद। फोटोग्राफी अगर जुनून के साथ सीखी जाए तो कैमरा केवल तस्वीरें खींचने का माध्यम नहीं रहता, बल्कि वह किसी शहर की संस्कृति, इतिहास और पहचान को दुनिया के सामने रखने का सशक्त जरिया बन जाता है। फर्रुखाबाद के शांतनु कटियार ने अपनी फोटोग्राफी के माध्यम से इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए इस क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है।
शांतनु की तस्वीरों में फर्रुखाबाद की आन-बान और शान दिखाई देती है। शहर के धार्मिक आयोजनों से लेकर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत तक को उन्होंने अपने कैमरे में संजोने का लगातार प्रयास किया है। विश्रांत घाट, पांचाल घाट और फर्रुखाबाद में निकलने वाली प्रसिद्ध राम यात्रा एवं शिव यात्रा के चित्रों के माध्यम से उन्होंने शहर की आस्था और सांस्कृतिक जीवन को सामने रखा है।
उनके कैमरे ने केवल धार्मिक और स्थानीय आयोजनों को ही नहीं, बल्कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ यात्रा जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों को भी अपने फ्रेम में जगह दी। स्थानीय जीवन की छोटी-छोटी खूबसूरत झलकियों से लेकर बड़े सार्वजनिक आयोजनों तक, शांतनु की फोटोग्राफी में फर्रुखाबाद की विविधता दिखाई देती है।
शांतनु की फोटोग्राफी यात्रा की खास उपलब्धि यह है कि उनका हुनर अब केवल व्यक्तिगत शौक या स्थानीय कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। भारतीय सेना, जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और पुलिस विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में फोटोग्राफी का अवसर मिलने के साथ उन्होंने अपने अनुभव को प्रशिक्षण के रूप में भी आगे बढ़ाया है।
फतेहगढ़ पुलिस और भारतीय सेना के जवानों को फोटोग्राफी का प्रशिक्षण देने का अवसर उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। जिस कला की शुरुआत कैमरे के प्रति रुचि और जुनून से हुई, वही आगे चलकर दूसरों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी तक पहुंची।
फर्रुखाबाद की संस्कृति और पर्यटन को तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तुत करने में भी उनका योगदान रहा है। फर्रुखाबाद पॉकेट बुक और कॉफी टेबल बुक के लिए भी उन्होंने पर्यटन विभाग के सहयोग से अपना योगदान दिया। इससे स्थानीय विरासत और पर्यटन स्थलों को बेहतर दृश्यात्मक प्रस्तुति देने में मदद मिली।
शांतनु का मानना है कि फोटोग्राफी केवल कैमरे की तकनीक नहीं, बल्कि नजरिया, धैर्य और सही क्षण को पहचानने की कला है। एक अच्छी तस्वीर किसी स्थान या व्यक्ति की पूरी कहानी बिना शब्दों के कह सकती है।
आज जब मोबाइल फोन के रूप में कैमरा लगभग हर हाथ में मौजूद है, शांतनु की यात्रा युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। उनका सफर बताता है कि शुरुआत महंगे उपकरण से नहीं, बल्कि सीखने की इच्छा और लगातार अभ्यास से होती है। हुनर विकसित हो तो वही कैमरा रोजगार, सम्मान और पहचान का माध्यम बन सकता है।
फर्रुखाबाद की गलियों, घाटों, यात्राओं और सांस्कृतिक विरासत को कैमरे में सहेजते-सहेजते शांतनु कटियार ने फोटोग्राफी को अपना परिचय बना लिया है। अब उनका कैमरा केवल तस्वीरें नहीं खींचता, बल्कि फर्रुखाबाद की कहानी भी कहता है।


