– 360 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, 80 प्रतिशत स्थानीय सामग्री का प्रस्ताव
– मेक इन इंडिया और हाई-स्पीड रेल मिशन को मिल सकती है नई रफ्तार
नई दिल्ली। भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में रूस ने अपनी इवोल्गा हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक भारत को देने का प्रस्ताव रखा है। रूसी प्रस्ताव के मुताबिक इवोल्गा ट्रेन करीब 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम होगी। साथ ही भारत में इसके निर्माण के दौरान करीब 80 प्रतिशत स्थानीय सामग्री के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा।
रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत देश में आधुनिक और तेज रफ्तार रेल नेटवर्क विकसित करने पर तेजी से काम कर रहा है। प्रस्ताव को मेक इन इंडिया और भारत के हाई-स्पीड रेल लक्ष्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।
रूसी प्रस्ताव की खास बात स्थानीयकरण को लेकर है। योजना के तहत ट्रेन तकनीक को भारत में अपनाते हुए बड़े पैमाने पर स्थानीय सामग्री और भारतीय औद्योगिक क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे देश में हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण की तकनीकी क्षमता विकसित करने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
भारत पहले ही देश में लंबी दूरी के लिए आधुनिक स्लीपर ट्रेनों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वंदे भारत स्लीपर से जुड़े सहयोग और विकास के बीच रूस का इवोल्गा प्रस्ताव हाई-स्पीड रेल क्षेत्र में एक और संभावित विकल्प सामने रखता है।
360 किमी प्रति घंटे तक की प्रस्तावित रफ्तार इसे भारत के भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बना सकती है। हालांकि, किसी अंतिम समझौते से पहले तकनीकी मानकों, लागत, सुरक्षा, परिचालन आवश्यकताओं और भारतीय रेल नेटवर्क के साथ अनुकूलता का विस्तृत मूल्यांकन जरूरी होगा।
रूस के इस प्रस्ताव से भारत के पास हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक के क्षेत्र में एक और विकल्प खुल सकता है। यदि प्रस्ताव पर आगे सहमति बनती है तो तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय उत्पादन और भारतीय कंपनियों की भागीदारी के जरिए देश में हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण का नया औद्योगिक आधार तैयार हो सकता है।


