नई दिल्ली: जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर हाल में हुए प्रदर्शनों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कहा है कि इन्हें केवल भ्रष्टाचार के मुद्दे तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। संघ के मुताबिक, ऐसे प्रदर्शन देश की व्यवस्थाओं में मौजूद व्यापक खामियों की ओर इशारा करते हैं। RSS ने सरकार से इन कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।
विशाखापत्तनम में आयोजित RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के समापन पर वरिष्ठ नेता सी. आर. मुकुंद ने कहा कि देश की विभिन्न व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलाव अव्यवस्था या विनाश के जरिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को मजबूत करके लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शनों को बैठक में एक बड़ी समस्या के संकेत के तौर पर देखा गया। सरकार को NEET जैसे अलग-अलग मामलों से आगे बढ़कर युवाओं और समाज की व्यापक चिंताओं का समाधान करना होगा।
बैठक में डेमोग्राफिक डिसबैलेंस, युवाओं के विरोध प्रदर्शन और सामाजिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। मुकुंद ने कहा कि कुछ समुदायों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, जबकि कुछ की वृद्धि दर घट रही है। प्रजनन दर में गिरावट और कुछ क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय असंतुलन से सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ने की चिंता भी व्यक्त की गई।
RSS ने छोटे शहरों, गांवों और स्कूलों तक बढ़ते नशे के प्रसार को गंभीर चुनौती बताया। संगठन के अनुसार, इसका सबसे अधिक असर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। मुकुंद ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि RSS के प्रशिक्षण शिविरों में हर साल करीब 21 हजार युवा स्वयंसेवक हिस्सा लेते हैं और शाखाओं की दैनिक उपस्थिति में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं।


