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Thursday, June 18, 2026

टेराकोटा कार्यशाला में मिट्टीकला प्रशिक्षण दे रहे भोपाल के प्रसिद्ध मूर्तिकार

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फर्रुखाबाद।मदन मोहन कनोडिया जूनियर विद्यालय लोहई रोड उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ, संस्कृति विभाग उ.प्र. एवं संस्कार भारती फर्रुखाबाद के संयुक्त तत्वावधान में “सृजन” कार्यक्रम के अंतर्गत मिट्टीकला (टेराकोटा) कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला निर्देशक संजय कुमार सिंह आईएस विशेष सचिव संस्कृतिक विभाग उत्तर प्रदेश विशाल सिंह आईएस संस्कृतिक विभाग उत्तर प्रदेश अतुल द्विवेदी निदेशक उत्तर प्रदेश प्रमुख सचिव, संस्कृति विभाग उ.प्र. लोक एवं जनजाति सांस्कृतिक संस्थान, लखनऊ के निर्देशन में हो रहा है।
भोपाल से आए मूर्ति शिल्पकला साधक प्रशिक्षक प्रदीप कुमार के साथ अनाथ्या, आकृति, वैष्णवी, यश, रामाश, पूर्वी, मोनिका बच्चों को परंपरागत टेराकोटा कला की बारीकियां सिखा रहे हैं। प्रशिक्षण में बच्चों को मिट्टी तैयार करना, पानी का प्रयोग, मिट्टी को माड़ना (लोच देना), रोल करना, गोलियां बनाना, बेलनाकार, अंडाकार, आयताकार मॉडल्स के माध्यम से उनके अंग बनाना जैसे पांडा, खरगोश, बिल्ली, कुत्ता, बत्तख, मोर हाथी आदि बनाना सुखाकर तथा रंगों से सजाकर पेंट करना सिखाया जा रहा है। प्रशिक्षक प्रदीप कुमार ने बताया कि यह कला भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के संरक्षण का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दे रहे है।
इस अवसर पर संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री सुरेंद्र पाण्डेय ने कहा कि माटी कला के माध्यम से जनपद अपनी प्राचीन संस्कृति और इतिहास से जुड़ रहा है। “पांचाल जनपद में मिट्टीकला की प्राचीनता संकिसा, काम्पिल, कन्नौज, अहिच्छत्र, आमला एवं कानपुर देहात में मिले किले के अवशेषों में टेराकोटा, सील-सिक्के, मृदभांड के रूप में मिलती है। ये हमारी संस्कृति, सभ्यता की धरोहर हैं जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक हैं।”
कार्यशाला में संस्कार भारती के अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह राठौर, सचिव गौरव मिश्रा “बंटी”, नरेन्द्र नाथ मिश्र, संयोजक अनुराग अग्रवाल, अनुभव सारस्वत, अरविंद दीक्षित, रवींद्र भदौरिया, कुलभूषण श्रीवास्तव, अनुराग पाण्डेय रिंकू, अशोक शुक्ला, विनय अग्रवाल,संजय गर्ग, राजेंद्र दीक्षित रज्जू भैया आदेश अवस्थी, संरक्षक प्रमोद अग्रवाल, समरेंद्र शुक्ल, अर्पण शाक्य, आशीष शर्मा, नवीन मिश्रा आदि उपस्थित रहे। गुंजा जैन अजीत दीक्षित ने भी कार्यशाला का भ्रमण कर गतिविधियों की सराहना की। आयोजकों ने कहा कि इस कार्यशाला से बच्चों में नई उमंग, उत्साह और आत्मनिर्भरता के साथ अपनी परंपरा को संरक्षित करने का भाव जागृत हो रहा है।

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