नई दिल्ली/कोलकाता
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को हुगली में आयोजित रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘गायब कुमार’ कहा। ममता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से लोगों के नाम गायब किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक यह मामला हल नहीं होता, उनकी पार्टी ज्ञानेश कुमार का विरोध करती रहेगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सामाजिक माध्यम पर संदेश जारी कर ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावों में निर्णायक की भूमिका दी है।
विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरों ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें नए मतदाताओं के आवेदन पत्र में बदलाव, मतदाता आंकड़ों के नियंत्रण, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों और गोवा में कुछ मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं होने जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन खबरों के बाद स्पष्ट किया कि एसआईआर सहित उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इसी बीच भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य ने एसआईआर और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के काम की प्रशंसा की। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अवैध रूप से रह रहे लोगों के नाम हटाए गए और लोगों को बिना डर मतदान करने का अवसर मिला। उनके बयान पर विपक्षी नेताओं ने पलटवार किया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने शुक्रवार को ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन भी किया।


