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Friday, July 10, 2026

J&K में ‘राष्ट्र-विरोधी’ कंटेंट वाली किताबों की जांच के आदेश, विपक्ष ने की कदम की आलोचना

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श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर सरकार (Government of Jammu and Kashmirऔर कश्मीर यूनिवर्सिटी (Kashmir Universityने किताबों की व्यापक समीक्षा शुरू की है। उन्होंने विभागों के प्रमुखों और स्कूल प्रिंसिपलों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी कोई भी सामग्री हटा दें जिसे “विवादास्पद” या “राष्ट्र-विरोधी” (anti-nationalमाना जाए।

यह कदम पिछले हफ्ते सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी के लिए एक किताब को वापस लेने और उस पर हुए राजनीतिक विवाद के बाद उठाया गया है। उस किताब में इस इलाके को “भारत-अधिकृत कश्मीर” (India-occupied Kashmir) और “भारत-नियंत्रित कश्मीर” (Indian-held Kashmir) बताया गया था, और प्रतिबंधित JKLF के संस्थापक मकबूल भट को “शहीद” कहा गया था।

 

समीक्षा के इस नए आदेश पर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इस फैसले को “बेहद चिंताजनक” बताया है।

मेहदी ने कहा, “लाइब्रेरी ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए होती हैं, न कि राजनीतिक नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए। किताबों को हटाने से इतिहास नहीं मिटता। इससे सिर्फ़ ज्ञान और पढ़ाई-लिखाई का स्तर गिरता है। एकेडमिक आज़ादी और इतिहास को जानने-समझने का अधिकार कभी भी वैचारिक नियंत्रण की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।”

PDP विधायक वहीद पारा ने भी इस आलोचना का समर्थन किया और समीक्षा को “इतिहास को मिटाने की प्रक्रिया” बताया।

4 जुलाई को, J&K के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने “बेहद अनुचित कंटेंट” के कारण दो किताबों को वापस लेने का आदेश दिया था – हिलाल अहमद और संतोष मीना की ‘पर्सनैलिटीज़ एंड लेजेंड्स ऑफ़ J&K’ (Personalities and Legends of J&K) और सुशांत गिरी की ‘ग्रेट पर्सनैलिटीज़ ऑफ़ जम्मू एंड कश्मीर’ (Great Personalities of Jammu and Kashmir)। ‘पर्सनैलिटीज़ एंड लेजेंड्स ऑफ़ J&K’ में “भारत-अधिकृत कश्मीर” और भट का ज़िक्र था। भट को CID इंस्पेक्टर की हत्या का दोषी ठहराए जाने के बाद फरवरी 1984 में तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी और वहीं दफनाया गया था। केंद्र द्वारा नियुक्त सिन्हा, केंद्र शासित प्रदेश J&K में कानून-व्यवस्था की देखरेख करते हैं।

कश्मीर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नसीर इक़बाल ने “राष्ट्र-विरोधी कंटेंट” वाली किताबों को हटाने के आदेश की पुष्टि की। इक़बाल ने कहा, “हमने विभागों से कहा है कि वे राष्ट्रीय हित के खिलाफ़ कोई भी किताब होने पर उसकी पहचान करें।” विभाग प्रमुख जांच करेंगे कि क्या किसी किताब में आपत्तिजनक कंटेंट है। इक़बाल ने आगे कहा, “अगर किसी विभाग को कोई विवादास्पद किताब मिलती है, तो उससे उम्मीद की जाती है कि वह उसे खुद ही हटा दे।”

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