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Sunday, April 26, 2026
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18 वर्षीय दिव्यांग छात्र का शव पेड़ से लटका मिला, पुलिस जांच में जुटी

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हरदोई जिले के सुरसा थाना क्षेत्र के तुर्तीपुर गांव के मजरा रेंदा पुरवा में मंगलवार को एक 18 वर्षीय युवक का शव पेड़ से लटका हुआ मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान प्रियांशु पुत्र राधेश्याम के रूप में हुई है, जो स्वामी राम कृष्ण परमहंस इंटर कॉलेज, मलिहामऊ में कक्षा 12 का छात्र था। वह एक हाथ और एक पैर से दिव्यांग भी था, जिससे परिवार पर पहले से ही विशेष जिम्मेदारी बनी हुई थी।

जानकारी के अनुसार, प्रियांशु लगभग एक सप्ताह पहले घर से लखनऊ जाने की बात कहकर निकला था। परिजनों का कहना है कि वह दुबग्गा स्थित एक विकलांग स्कूल जाने की बात कह रहा था, लेकिन उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा था।

मंगलवार को उसके पिता राधेश्याम खेत पर गए थे, तभी गांव से करीब 100 मीटर दूर स्थित एक बाग में उन्हें तेज दुर्गंध महसूस हुई। जब वे वहां पहुंचे तो उन्होंने अपने बेटे का शव पेड़ से लटका हुआ पाया। यह दृश्य देखकर परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक फैल गया।

मृतक प्रियांशु अपने चार भाइयों—हिमांशु, दिब्यांशु, सुधांशु और शिवांशु में तीसरे नंबर का था। उसके पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

थाना प्रभारी सुनील मिश्रा ने बताया कि शव करीब 5–6 दिन पुराना प्रतीत हो रहा है और सड़ने के कारण काफी क्षत-विक्षत हो गया था। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।

आगरा–मुरादाबाद हाईवे पर भीषण हादसा, कार में आग लगने से चालक समेत 2 की मौत

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संभल जिले में आगरा–मुरादाबाद हाईवे पर सोमवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में कार चालक की जलकर मौत हो गई, जबकि एक बाइक सवार ने भी अपनी जान गंवा दी। इस हादसे में कार सवार तीन युवक गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

यह घटना चंदौसी तहसील के बनियाठेर थाना क्षेत्र के गांव आटा के पास करीब शाम 5:30 बजे हुई। बताया गया कि तेज रफ्तार कार ने सामने आए बाइक सवार को बचाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गया।

टक्कर के तुरंत बाद कार में आग लग गई और वह देखते ही देखते आग का गोला बन गई। वाहन में सवार लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलने पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक चालक की मौत हो चुकी थी।

मंगलवार को मृतक चालक की पहचान अरुण शर्मा (20) पुत्र स्वर्गीय भवनेश शर्मा, निवासी गोलागंज, कस्बा बहजोई के रूप में हुई। जानकारी के अनुसार, अरुण अपने परिवार का इकलौता बेटा था और दुखद बात यह है कि उसके पिता की भी करीब 18 साल पहले एक सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी।

इस हादसे में बाइक सवार अवधेश कुमार (45) पुत्र ओमकार, निवासी गांव लहरशीश, थाना हयातनगर की भी मौत हो गई। वहीं कार में सवार ललतेश (20), हिमांशु (22) और रितिक शर्मा (28), निवासी जिला बदायूं गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उनका इलाज जारी है।

पुलिस के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त कार आस मोहम्मद पुत्र मोहम्मद हनीफ, निवासी अल्हेपुर, थाना इस्लामनगर (बदायूं) के नाम पर पंजीकृत है। मामले की जांच जारी है।

सीओ डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चालक अरुण शर्मा की मौत जलने से होने की पुष्टि हुई है। पुलिस हादसे के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

एएसपी अनुज चौधरी समेत पुलिसकर्मियों पर एफआईआर आदेश पर हाईकोर्ट की रोक जारी

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संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक फिलहाल जारी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। मंगलवार को सुनवाई उस कारण टल गई क्योंकि केस रजिस्टर्ड नंबर पर सूचीबद्ध नहीं हो सका।

यह मामला उस आदेश से जुड़ा है, जो संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने दिया था। इस आदेश में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश को पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता यामीन की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर सीजेएम कोर्ट ने 9 जनवरी 2025 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद एएसपी अनुज चौधरी ने 29 जनवरी 2025 को इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अलग से याचिका दायर की।

इस मामले में पहले भी 10 फरवरी 2025 को न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सीजेएम के आदेश पर रोक लगा दी थी, जो अब भी प्रभावी है। इससे पहले 9 फरवरी 2025 को भी करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई थी।

पूरा मामला 6 फरवरी 2024 को दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें संभल निवासी यामीन ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे आलम को 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पुलिस ने गोली मारी थी। इसी आधार पर उन्होंने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था।

इसी बीच 24 नवंबर 2024 को संभल में उस समय हिंसा भड़क गई थी, जब मस्जिद के सर्वे को लेकर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव-फायरिंग की घटनाएं हुईं। इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हुई थी और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

इस मामले में अब तक 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमे हुए हैं। कई आरोपियों की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद कुछ को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिल चुकी है।

महिला की मौत के बाद अवैध क्लीनिक सील, स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई

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कासगंज

जनपद के ज्वालापुरी क्षेत्र में एक 65 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध क्लीनिक को सील कर दिया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, महिला का उपचार एक निजी क्लीनिक में किया जा रहा था, जहां इलाज के दौरान ही उसकी हालत बिगड़ गई और मौत हो गई। मामले की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और क्लीनिक की गहन जांच की गई। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम का नेतृत्व कर रहे चिकित्सक डॉ. कुंवर उत्कर्ष ने बताया कि क्लीनिक में न तो उपचार से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मिले और न ही आवश्यक पंजीकरण के प्रमाण प्रस्तुत किए जा सके। इसके अलावा क्लीनिक में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब पाई गई और मौके पर कोई प्रशिक्षित स्टाफ भी मौजूद नहीं था, जो स्वास्थ्य मानकों की खुली अनदेखी को दर्शाता है।
इन सभी खामियों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से क्लीनिक को सील कर दिया। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव अग्रवाल ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अपंजीकृत और संदिग्ध चिकित्सा संस्थान में इलाज कराने से बचें तथा केवल अधिकृत और पंजीकृत अस्पतालों में ही उपचार कराएं।
इस घटना ने एक बार फिर जनपद में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की समस्या को उजागर कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे संस्थानों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

दूधिया की मौत पर बवाल: आक्रोशित ग्रामीणों का पुलिस पर पथराव, जीटी रोड घंटों जाम

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एटा

जनपद के सकीट थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब घायल दूधिया की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मौके पर जमकर हंगामा करते हुए पुलिस पर पथराव कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने शव को जीटी रोड पर रखकर जाम लगा दिया, जिससे इलाके में कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
मिली जानकारी के अनुसार, फिरोजाबाद जनपद के एका थाना क्षेत्र के नगला गड़रिया निवासी 23 वर्षीय बबलू, जो पेशे से दूध का कारोबार करते थे, अपनी ससुराल कर्मचंदपुर जा रहे थे। इसी दौरान नोकसपुर गांव के पास किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस करीब दो घंटे की देरी से पहुंची।
घायल युवक को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस खबर के मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने पहले घटनास्थल पर पुलिस पर पथराव किया और बाद में शव को जीटी रोड पर रखकर जाम लगा दिया। इस दौरान शहर कोतवाली इंस्पेक्टर प्रेमपाल सिंह सहित कई पुलिसकर्मियों से हाथापाई भी की गई।
स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन को भारी पुलिस बल और पीएसी बुलानी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को आश्वासन दिया कि एंबुलेंस की देरी के मामले की जांच कराई जाएगी।
जाम के कारण सैकड़ों वाहन जीटी रोड पर फंस गए, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई बारातें भी इस जाम में फंसी रहीं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बाद में पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग से वाहनों को निकलवाया।
वहीं एंबुलेंस कर्मियों का कहना है कि वे समय पर पहुंचे थे, लेकिन मौके पर भारी भीड़ और पथराव के कारण सीधे घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके। अतिरिक्त पुलिस बल आने के बाद ही वे घायल को लेने पहुंचे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है और हादसे में शामिल अज्ञात वाहन की तलाश जारी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

आईएएस अरविंद सिंह एटा के नए जिलाधिकारी

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प्रशासनिक फेरबदल में मिली बड़ी जिम्मेदारी

एटा

शासन द्वारा किए गए ताजा प्रशासनिक फेरबदल में 2015 बैच के आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह को एटा जनपद का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके नाम की घोषणा होते ही जिले के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और जल्द ही उनके कार्यभार ग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है।
अरविंद सिंह इससे पहले लखनऊ में सहायक भू-लेख आयुक्त के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने राजस्व और भूमि संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली के चलते उन्हें एटा जैसे महत्वपूर्ण जिले की कमान सौंपी गई है।
शैक्षिक पृष्ठभूमि की बात करें तो अरविंद सिंह ने वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने लखनऊ से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी किया है। तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों की समझ उन्हें प्रशासनिक कार्यों में एक अलग दृष्टिकोण प्रदान करती है।
पूर्व में वे बलरामपुर जिले के जिलाधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उनके कार्यकाल को प्रभावी प्रशासन और विकास कार्यों के लिए सराहा गया। अब एटा में उनकी तैनाती को लेकर स्थानीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि वे जिले में विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।
वहीं वर्तमान जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह, जिनका कार्यकाल एटा में करीब ढाई वर्ष रहा, का तबादला कर उन्हें अपर राज्य परियोजना निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान (मध्याह्न भोजन अभिकरण) के पद पर भेजा गया है। उनके कार्यकाल में जिले में कई विकास योजनाओं को गति मिली और प्रशासनिक स्तर पर कई अहम पहल की गईं।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई दिनों से जिले में डीएम के तबादले की चर्चाएं चल रही थीं, जिस पर अब मुहर लग गई है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने नए जिलाधिकारी से बेहतर प्रशासन और जनहित में प्रभावी निर्णयों की अपेक्षा जताई है।