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Saturday, April 25, 2026
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मैनपुरी में सड़क हादसा, तेज रफ्तार कार ने बाइक में मारी ठोकर, जीजा-साले की मौत

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मैनपुरी: यूपी के मैनपुरी (Mainpuri) जिले में रफ्तार का कहर देखने को मिला है, जहां तेज रफ्तार कार (speeding car) ने बाइक सवार जीजा-साले को चपेट में ले लिया। घटना में दोनों की मौत हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों के बीच हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों की लाश का पंचनामा कर पीएम के लिए भेजा गया। पुलिस घटना की जांच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, घटना थाना बेवर क्षेत्र काली नदी के पास घटी है। जीजा-साला रिश्तेदारी में शादी में शामिल होने के लिए गए थे। वापसी के दौरान तेज रफ्तार ने ठोकर मार दी। घटना में दोनों की मौके पर ही जान चल गई, वहीं हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। इस हादसे की जानकारी मिलते ही लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी।

जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों की लाश को पीएम के लिए भेजा। मृतकों की पहचान 28 वर्षीय विपिन कुमार (जीजा) 25 वर्षीय राजू कश्यप (साला) के रूप में हुई है। पुलिस फरार वाहन चलाक की तलाश कर रही है। शिकायत के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करने की बात कह रही है।

 

बड़ा फर्जीवाड़ा: माफिया के गुर्गे सपा नेता कौशल सिंह यादव नें बाउंस चेक, जाली सौदा कर की संगठित ठगी

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– पुलिस में शिकायत, जाँच के आदेश

फर्रुखाबाद। जमीन खरीद-फरोख्त के नाम पर एक और बड़ा धोखाधड़ी के मामले में पुलिस नें जाँच शुरू की है , जहां विक्रय पत्र के जरिए भरोसा दिलाकर करीब ₹20 लाख की रकम हड़प लिया गया है। पीड़िता श्रीमती रेनू ने पूरे मामले को संगठित ठगी बताते हुए पुलिस से सख्त कार्रवाई और रकम वापसी की मांग की है।

शिकायत के मुताबिक, मुख्य आरोपी कौशल सिंह यादव ने विक्रय पत्र में चेक का उल्लेख कर भुगतान का भरोसा दिया। इसके बाद ₹100 के स्टांप पर एक समझौता पत्र बनाकर बकाया रकम देने की बात कही गई। आरोपी ने अपने साथी शिवओम सिंह पुत्र राजेश्वर सिंह निवासी ढकिया तिवारी तहसील तिलहर शाहजहांपुर के साथ मिल विक्रय पत्र पर उससे चेक संख्या डलवा कर बैनामा करवा लिया, और अपने साथी पवन कटियार, पंकज कटियार, अनिल कटियार चंदू आदि से शीघ्र का चेक का भुगतान करने का आश्वासन दिया और खुद भी कौशल यादव ने आईडीबीआई बैंक, फर्रुखाबाद शाखा का चेक संख्या 207047 “केदार ट्रेडर्स” के नाम से दिया और बाकी ₹5 लाख नकद देने का वादा किया, जो आज तक पूरा नहीं हुआ। यह पूरा गैंग जनपद में काली कमाई के जरिए करोड़ों की जमीनों की खरीद फरोख्त कर अवैध ढंग से बिना लेआउट पास कराये शहर क्षेत्र में कॉलोनिया गुलजार करते आए हैं।

पहले यह गैंग माफिया अनुपम दुबे और उसके गैंगस्टर भाई अनुराग दुबे डब्बन के लिए काम करता था, उनके जेल जाने के बाद अब यह गैंग भाजपा और क्षत्रिय समाज के एक नेता और उनके एक खास गुर्गे के संरक्षण में काम करने लगा है, यह लोग अधिकारियों को गुमराह कर इस गैंग का संरक्षण करते हैं अंदर खाने उनके साथ समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रहे विजय सिंह के परिजन भी शामिल हैं। यह गैंग जिले में नकली डीजल को बनाने का भी काम करता है पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा रोशनाबाद में इस गैंग के मुख्य सदस्य के नकली पेट्रोल पंप पर कार्रवाई कर चुका है और मुकदमा भी पंजीकृत होने के बाद विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है जिसको भाजपा नेताओं के दबाव में तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कार्रवाई किए बगैर दवा लिया था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब पीड़िता ने 7 नवंबर 2025 को कौशल यादव की दी हुई चेक को एक्सिस बैंक, ठंडी सड़क शाखा में अपने खाते में लगाया, तो चेक बाउंस हो गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि शुरुआत से ही भुगतान को लेकर धोखाधड़ी की साजिश रची गई थी।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा कर जमीन का पंजीकरण अपने साथी शिवओम सिंह पुत्र राजेश्वर सिंह के नाम करा लिया। बाद में पता चला कि शिवओम सिंह, अनिल कटियार उर्फ चंदू का कर्मचारी है, जिससे इस पूरे मामले में एक संगठित गिरोह की भूमिका सामने आ रही है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने न केवल आर्थिक ठगी की, बल्कि कानूनी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर पीड़िता को जाल में फंसाया। पूरे घटनाक्रम में बैंकिंग प्रक्रिया, फर्जी आश्वासन और मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं।

पीड़िता ने 21 अप्रैल 2026 को पुलिस से गुहार लगाते हुए कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए और उसकी ₹7 लाख की रकम वापस दिलाई जाए।थाना कादरीगेट पुलिस नें जाँच शुरू की है।मामले की जानकारी पुलिस कप्तान को भी दी गईं है।

दिल्ली-एनसीआर में ग्रेनेड हमलों और हत्याओं की योजना बनाने के आरोप में ISI के दो ऑपरेटिव गिरफ्तार

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (special sale) ने पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर और ISI के एजेंट शहजाद भट्टी के इशारे पर काम करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने Delhi-NCR क्षेत्र में गोलीबारी, ग्रेनेड हमले और लक्षित हत्याओं की साजिश का पर्दाफाश किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

आरोपियों की पहचान राजवीर (21) और विवेक बंजारा (19) के रूप में हुई है, दोनों मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं। स्पेशल सेल ने इन्हें गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त (स्पेशल सेल) प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने एक बयान में कहा, “इनकी गिरफ्तारी से राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में होने वाले नियोजित हमलों को नाकाम कर दिया गया। इन गिरफ्तारियों से भट्टी द्वारा रची गई एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जो आईएसआई से जुड़े अन्य हैंडलर्स के साथ मिलकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं की भर्ती कर रहा था और उन्हें दिल्ली-एनसीआर में लक्षित हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने के लिए तैनात कर रहा था।”

अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में ग्रेनेड हमले और लक्षित हत्याओं की योजना के बारे में सूचना मिलने के बाद 31 मार्च को इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था। अधिकारी ने आगे बताया, “विवेक बंजारा को सबसे पहले 16 अप्रैल को ग्वालियर के डबरा से खोजा गया और गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान, उसने अपने सहयोगी राजवीर के बारे में जानकारी दी, जिसके आधार पर राजवीर को 18 अप्रैल को दिल्ली के सराय काले खान इलाके से गिरफ्तार किया गया।”

पुलिस ने बताया कि राजवीर अपने सरगना शहजाद भट्टी के निर्देश पर दिल्ली-एनसीआर के एक प्रमुख होटल को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा था, तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से एक पिस्तौल और छह जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके अलावा, साजिश से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो और वॉयस नोट वाले दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए।

आरोपी का विवरण साझा करते हुए पुलिस ने बताया कि ग्वालियर जिले के डबरा निवासी राजवीर एक युवा रंगरूट है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से भट्टी के नेटवर्क के संपर्क में आया था।

अधिकारी ने बताया, “वह भट्टी के एक सहयोगी, जिसकी पहचान ‘राणा भाई’ के रूप में हुई है, के सीधे नियंत्रण में था और उसे महत्वपूर्ण परिचालन जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। उसने कथित तौर पर गतिविधियों के समन्वय, हथियार जुटाने और सुनियोजित हमलों को अंजाम देने में केंद्रीय भूमिका निभाई।”

उन्होंने आगे बताया कि ग्वालियर जिले के विवेक बंजारा को भी राजवीर ने इस नेटवर्क से परिचित कराया था। जांचकर्ताओं ने बताया कि विवेक रसद और जासूसी में सहायता करता था और हैंडलर्स के निर्देशों पर यात्रा की सुविधा प्रदान करने, हथियार प्राप्त करने और आपराधिक कृत्यों का दस्तावेजीकरण करने में सक्रिय रूप से शामिल था।

दोनों आरोपियों को आसानी से पैसा कमाने के लालच में फंसाया गया और धीरे-धीरे वे आपराधिक नेटवर्क में और गहराई तक शामिल हो गए। अधिकारी ने बताया, “मार्च में, राजवीर को अहमदाबाद से हथियार लाने के लिए एक सहयोगी को भेजने का निर्देश दिया गया था। तदनुसार, विवेक वहां गया, हालांकि हथियारों की डिलीवरी नहीं हो सकी। भट्टी ने उसके रहने के लिए 5,000 रुपये का इंतजाम किया था।”

इसके बाद, 9 अप्रैल को, दोनों अमृतसर गए, जहां कथित तौर पर उन्हें एक पिस्तौल, 15-20 जिंदा कारतूस और 20,000 रुपये मिले। उन्हें पंजाब के जीरकपुर में एक क्लब पर गोलीबारी करने का काम सौंपा गया था, जिसे कथित तौर पर भट्टी से फिरौती की धमकी मिली थी। 11 अप्रैल को राजवीर ने कथित तौर पर गोलीबारी करने का प्रयास किया, लेकिन हथियार में तकनीकी खराबी के कारण वह असफल रहा।

विवेक ने घटना का वीडियो बनाकर अपने हैंडलर को भेजा। पुलिस ने बताया कि राजवीर ने बाद में दिल्ली लौटते समय हथियार छिपा लिया और भट्टी को उसकी लोकेशन बता दी। अधिकारी ने कहा, “दिल्ली-एनसीआर में कुछ दिन बिताने के बाद, वह फिर से पंजाब गया, जहां से उसने एक और पिस्तौल और गोला-बारूद इकट्ठा किया और फिर राजधानी लौट आया। अन्य सदस्यों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।”

 

लोको रोड पर दबंगों का कहर, युवक पर लाठी-डंडों से हमला, जान से मारने की धमकी

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फर्रुखाबाद।
जनपद के कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र में एक बार फिर दबंगों के हौसले बुलंद नजर आए। लोको रोड स्थित एक युवक पर दिनदहाड़े हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामले में नामजद आरोपी सहित एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोको रोड फतेहगढ़ निवासी अभिषेक प्रताप सिंह पुत्र स्वर्गीय विजयपाल सिंह अपने घर के बाहर झाड़ू लगा रहे थे। तभी अचानक वहां विक्रम सिंह गहलवार निवासी दुर्गा कॉलोनी अपने दो अज्ञात साथियों के साथ पहुंचा। बिना किसी पूर्व विवाद के ही आरोपियों ने अभिषेक पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया।
हमले के दौरान अभिषेक को जमीन पर गिरा दिया गया, जिसके बाद आरोपियों ने लात-घूसों से जमकर मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोपियों ने अभिषेक को जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे वह बुरी तरह सहम गया। किसी तरह वह खुद को बचाकर भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन आरोपी विक्रम सिंह ने उसका मुंह पकड़कर उसे धक्का दे दिया।
इसी दौरान मौके पर पहुंचे रिशु यादव पुत्र सुरेंद्र सिंह ने साहस दिखाते हुए बीच-बचाव किया और अभिषेक को हमलावरों से बचाया। स्थानीय लोगों के जुटने की आहट पाकर आरोपी मौके से फरार हो गए, लेकिन जाते-जाते जान से मारने की धमकी देकर दहशत फैलाने की कोशिश की।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और पीड़ित की तहरीर के आधार पर नामजद आरोपी विक्रम सिंह गहलवार सहित एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मंदिर की दीवार तोड़ने के विवाद में बवाल, चार आरोपियों पर मारपीट व धमकी का मुकदमा दर्ज

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फर्रुखाबाद।
कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र में मंदिर की दीवार तोड़ने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मारपीट और जान से मारने की धमकी तक पहुंच गया है। सिविल लाइन मड़ैया तिर्वा कोठी निवासी एक व्यक्ति की तहरीर पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित संजय ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 17 अप्रैल की रात बैलगाड़ी के जरिए गरैया खारे स्थित मंदिर की चारदीवारी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जब उसे इस घटना की जानकारी हुई तो उसने आरोपियों शीलू और उसके चचेरे भाई सुमित यादव पुत्र लाल सिंह यादव से इसकी शिकायत की और दीवार की मरम्मत कराने को कहा।
आरोप है कि इस बात पर दोनों आरोपी भड़क गए और गाली-गलौज करने लगे। स्थिति को बिगड़ता देख पीड़ित वहां से चला गया, लेकिन बाद में आरोपियों के घर शिकायत करने पहुंचा। इसी दौरान शीलू और सुमित वहां से भाग निकले, लेकिन कुछ देर बाद अपने अन्य साथियों अमित यादव और लालू यादव को साथ लेकर वापस आए और आक्रामक हो गए।
चारों आरोपियों ने एकजुट होकर पीड़ित के साथ हाथापाई शुरू कर दी और उस पर ईंट-पत्थर बरसाने लगे। इतना ही नहीं, आरोपियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी। हमले के दौरान पीड़ित किसी तरह अपनी जान बचाकर मौके से भाग निकला।
घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में तहरीर दी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अमित, सुमित, लालू और शीलू के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अदालत के आदेश पर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, साढ़े तीन करोड़ की ठगी में मुकदमा दर्ज

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फर्रुखाबाद।
जनपद में करोड़ों रुपये के निवेश से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। फर्जी बैंक गारंटी और झूठे दस्तावेजों के सहारे कंपनी संचालित कर निवेश हड़पने के आरोप में अदालत के आदेश पर पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित दो अज्ञात साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले के अनुसार, पीड़ित मनोज कुमार दुबे पुत्र शांति स्वरूप दुबे, निवासी सिविल लाइन इटावा ने अदालत में दायर वाद में बताया कि रविंद्र प्रताप भदौरिया निवासी बेवर उनके संपर्क में आया। उसने अपनी कंपनी सर्च पावर एंड एंपावर स्किल प्राइवेट लिमिटेड को चलाने के लिए उनके परिसर में जगह मांगी, जिस पर दोनों के बीच ₹3 लाख मासिक किराया तय हुआ।
आरोप है कि काफी समय बीतने के बाद भी जब किराया नहीं दिया गया और पीड़ित ने भुगतान की मांग की, तो आरोपी ने उन्हें कंपनी का डायरेक्टर बनाने का लालच दिया। इसके बाद कथित रूप से फर्जी बैंक आईडी और दस्तावेजों के आधार पर पीड़ित को कंपनी का डायरेक्टर दिखाया गया और उनसे करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का निवेश करा लिया गया।
पीड़ित का कहना है कि लंबे समय तक उन्हें निवेश पर कोई लाभांश नहीं मिला। जब उन्होंने इस संबंध में रविंद्र प्रताप से शिकायत की, तो आरोपी ने गुड़गांव स्थित देवी मंदिर परिसर में एक बैठक बुलाई, जहां उसने साफ तौर पर निवेश से ही इनकार कर दिया।
पीड़ित ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत मऊ दरवाजा थाने में की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक को भी अवगत कराया, फिर भी जब सुनवाई नहीं हुई तो न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। आदेश के अनुपालन में पुलिस ने आरोपी रविंद्र प्रताप भदौरिया और उसके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। दस्तावेजों की सत्यता, बैंक गारंटी और कंपनी के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।