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Friday, February 27, 2026
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पंजाब में विराट कांत के रूप में भाजपा को मिला नया राष्ट्रवादी ‘यूथ आइकन’

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(महेन्द्र कुमार शर्मा -विनायक फीचर्स)

पंजाब (Punjab) की जटिल राजनीति में विराट कांत का BJP में प्रवेश केवल एक राज्य की घटना नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे मोदी सरकार के उस ‘विजन’ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ वे ऐतिहासिक राष्ट्रवादी विरासत को आधुनिक युवा नेतृत्व के साथ जोड़ रहे हैं। विश्लेषक विराट कांत को ‘उत्तर का तेजस्वी सूर्या’ कह रहे हैं। एक ऐसा चेहरा जिसमें बौद्धिक प्रखरता भी है और महान राष्ट्रवादी डीएनए भी।

विराट कांत उस परिवार से आते हैं जिसने भारत की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक जड़ों को सींचा है। वे भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत के पोते और ‘पंजाब के गांधी’ कहे जाने वाले स्वतंत्रता सेनानी लाला अचिंत राम के पड़पोते हैं। लाला अचिंत राम संविधान सभा के सदस्य थे, जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी थी।

विराट के लिए यह विरासत कोई ‘प्रिविलेज’ नहीं, बल्कि एक कठिन मार्ग है। वे बड़े गर्व और जिम्मेदारी से कहते हैं, “मेरे परिवार ने पीढ़ियों से देश की सेवा की है, और वही सेवा का जज्बा आज मेरा मार्गदर्शन कर रहा है।” आज का युवा, जो केवल सत्ता के पीछे भागने वाले नेताओं से ऊब चुका है, विराट की इस “सेवा प्रथम” वाली विचारधारा में एक नई उम्मीद देख रहा है। यही कारण है कि मोदी कैंप उन्हें पंजाब से लेकर दिल्ली तक एक राष्ट्रीय युवा आइकन के रूप में पेश कर रहा है।

विराट के भाजपा में आने पर कई सवाल भी उठे, क्योंकि उनके दादा कृष्ण कांत जी ने 1970 के दशक में मूल्यों की राजनीति के लिए कड़े स्टैंड लिए थे। विराट इस पर एक बहुत ही परिपक्व विश्लेषण पेश करते हैं। वे इसे विचारधारा से हटना नहीं, बल्कि उसका ‘विकास’ मानते हैं। विराट का तर्क है, “मेरे दादाजी ने अपने दौर की चुनौतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। आज की सच्चाई यह है कि भारत को एक मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है।” वे मानते हैं कि ईमानदारी और राष्ट्रवाद के जिन मूल्यों के लिए उनके पूर्वजों ने अपना जीवन समर्पित किया, आज उन्हें केवल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही पूरा किया जा सकता है।

विराट कांत केवल अपनी विरासत के कारण चर्चा में नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी योग्यता भी काफी प्रभावशाली है। दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स और पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून (LL.B) की पढ़ाई करने वाले विराट एक प्रखर वकील हैं। प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी। विराट बताते हैं कि पीएम मोदी ने उनसे घंटों इस बात पर चर्चा की कि कैसे युवाओं को नीति-निर्माण में आगे आना चाहिए। प्रधानमंत्री का मंत्र “विश्वास के साथ बड़ी जिम्मेदारी आती है”आज विराट के राजनीतिक जीवन का आधार बन गया है।

पंजाब आज नशीले पदार्थों, कर्ज और माफिया राज के एक ऐसे भंवर में फंसा है, जहाँ से निकलने के लिए उसे एक नए विजन की जरूरत है। विराट कांत वर्तमान ‘आप’ सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहते हैं कि “आज ऐसा लगता है जैसे माफिया नेटवर्क सरकार चला रहा है और राज्य की सत्ता कमजोर पड़ गई है।” वे केवल आलोचना नहीं करते, बल्कि समाधान भी देते हैं। वे स्वतंत्र पुलिसिंग, आधुनिक तकनीक और कृषि विविधीकरण की बात करते हैं। किसानों के मुद्दे पर वे कहते हैं कि एमएसपी की सुरक्षा के साथ-साथ हमें खेती को वैश्विक बाजार के लिए तैयार करना होगा।

विराट कांत का भाजपा में उदय इस बात का संकेत है कि पार्टी अब उन शिक्षित और राष्ट्रवादी युवाओं को आगे बढ़ा रही है जो अपनी जड़ों से जुड़े हैं। वे उस ‘न्यू इंडिया’ के प्रतीक हैं जो अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करता है और भविष्य की चुनौतियों से लड़ने का दम रखता है। विराट का कहना है कि वे केवल नाम के सहारे नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके जनता का विश्वास जीतेंगे। आने वाले समय में, विराट कांत न केवल पंजाब बल्कि पूरे भारत में भाजपा के एक प्रखर और ओजस्वी चेहरे के रूप में दिखाई देंगे।

(विनायक फीचर्स)

हम समाज के नहीं, अपराध के खिलाफ हैं: यूथ इंडिया की कलम बिकेगी नहीं, झुकेगी नहीं

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शरद कटियार

फाउंडर & एडिटर -इन -चीफ
यूथ इंडिया न्यूज़ ग्रुप

इन दिनों प्रदेश में अपराधियों के विरुद्ध चल रही सख्त कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया (social media) पर तरह-तरह की बातें फैलाई जा रही हैं। कुछ लोग जानबूझकर इसे जातीय चश्मे से देखने और दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीण अंचल के भोले-भाले, कम पढ़े-लिखे युवाओं को भावनात्मक रूप से भड़काया जा रहा है। शासन-प्रशासन की वैधानिक कार्रवाई को समाज विशेष के खिलाफ बताया जा रहा है।

मैं आज स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूँ—अपराध की कोई जाति नहीं होती।गुंडा, माफिया, दरिंदा — इनकी पहचान इनके कर्म से होती है, जन्म से नहीं।जब उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन ने माफिया और गैंगस्टर के रूप में चिन्हित अपराधियों पर शिकंजा कसना शुरू किया, जब अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चला, जब आतंक का पर्याय बन चुके नाम जेल भेजे गए — तब कुछ तत्वों ने इसे जातीय रंग देने की कोशिश की।

फर्रुखाबाद हो या प्रदेश का कोई अन्य जनपद — जो भी अपराधी कानून के दायरे में आया, वह अपने कर्मों की वजह से आया। यह सत्य है कि कुछ ऐसे लोग, जिन्होंने वर्षों तक भय, अवैध धन और हिंसा के बल पर साम्राज्य खड़ा किया, उन्होंने स्वयं को समाजसेवी का चोला पहनाकर प्रस्तुत किया। लेकिन सच का चेहरा देर से सही, सामने आता अवश्य है।

जो लोग समाज के भीतर ही निर्दोषों का उत्पीड़न करते रहे, जिन्होंने अपने ही परिचितों, अपने ही क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय किया, जिन पर हत्या, कब्जा, धमकी और शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे,वे जब कानून के शिकंजे में आए तो कुछ लोगों ने भावनात्मक कथा गढ़नी शुरू कर दी।

हम स्पष्ट करना चाहते हैं ,

यूथ इंडिया की कलम किसी समाज के खिलाफ नहीं है।

हमने सदैव सम्मानित ब्राह्मण समाज को आदर दिया है। हमने उन्हें “भूसूर” — धरती के देवता — कहकर सम्मानित किया है।

यूथ इंडिया का उदय फर्रुखाबाद की उसी पावन धरती से हुआ, जिसे ब्राह्मण गढ़ कहा जाता है। हमें स्नेह मिला, समर्थन मिला, आशीर्वाद मिला। आज भी मिलता है। और हम उसके लिए कृतज्ञ हैं।

लेकिन कुछ युवा साथी, जो सोशल मीडिया के उकसावे में आकर असंयमित टिप्पणियाँ करते हैं, वह जान लें हम किसी जाति विशेष के विरोधी नहीं, बल्कि अपराध और अपराधी के विरोधी हैं। फर्रुखाबाद जनपद में गुंडाराज के खिलाफ यूथ इंडिया ने ही जब मुहिम चलाई थी, तभी 17 साल से संघर्ष कर रहे मेजर सुनील दत्त द्विवेदी जो भाजपा के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय ब्रह्म दत्त द्विवेदी के ज्येष्ठ पुत्र हैं, वह सदर विधानसभा से विधायक बन सके थे। यदि किसी अन्य समाज से संबंधित व्यक्ति पर भी अपराध सिद्ध होता है, तो यूथ इंडिया ने उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है और आगे भी करेगा। हमारी पत्रकारिता का आधार व्यक्ति की जाति नहीं, उसके कर्म हैं।हम न किसी दल के हैं, न किसी वर्ग के समर्थक।हम केवल पत्रकार हैं।पत्रकारिता हमारे लिए पेशा नहीं, तप है।यूथ इंडिया केवल एक मीडिया समूह नहीं, एक विचार है।

एक ऐसा दीपक, जो स्वयं जलकर समाज को रोशन करता है।

कुछ मुट्ठी भर लोग यदि सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हैं, तो उससे हमारा मार्ग नहीं बदलता। हमने धमकियाँ भी देखी हैं, मुकदमे भी देखे हैं, दबाव भी देखे हैं, लेकिन हमने कभी अपनी कलम नहीं बेची।

आज यूथ इंडिया उत्तर प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकल चुका है। देश के अनेक हिस्सों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। और वह दिन दूर नहीं जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूथ इंडिया की पहचान होगी।हम बेखौफ पत्रकारिता के पक्षधर रहे हैं और रहेंगे। गुंडा यदि किसी भी जाति का होगा हम उसे बेनकाब करेंगे।भ्रष्टाचार यदि किसी भी दल में होगा हम उसे उजागर करेंगे। अन्याय यदि किसी भी वर्ग पर होगा हम उसके साथ खड़े होंगे। हमारा संघर्ष समाज के खिलाफ नहीं, समाज को बचाने के लिए है। और अंत में,जो लोग भ्रम फैला रहे हैं, वे यह जान लें कि यूथ इंडिया की कलम झुकेगी नहीं।सत्य के मार्ग से हटेगी नहीं।और अपराध के सामने रुकेगी नहीं।यही हमारी प्रतिज्ञा है।

यही हमारी पत्रकारिता है।
यही यूथ इंडिया है।

आबकारी मामले में बरी होने के बाद केजरीवाल ने कहा- दिल्ली में अभी चुनाव कराओ, भाजपा 10 से अधिक सीटें जीतती है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा

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नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy) मामले में बरी होने के कुछ ही घंटों बाद, आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने भावुक लेकिन आक्रामक लहजे में केंद्र सरकार पर सीधा राजनीतिक हमला बोला। राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और इस विवादित मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में अभी चुनाव कराइए और देखिए क्या होता है। अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 10 से अधिक सीटें जीतती है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।” उन्होंने कहा, “अब केजरीवाल को हटाने का एकमात्र तरीका उनकी हत्या करवाना है। अन्यथा, प्रधानमंत्री को आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए विकास कार्यों से हज़ार गुना अधिक विकास कार्य करने चाहिए।” फैसले को “ईमानदारी की सबसे बड़ी जीत” बताते हुए, केजरीवाल ने अदालत के फैसले को न केवल कानूनी राहत बल्कि नैतिक न्याय भी बताया।

अपने संबोधन की शुरुआत न्यायपालिका को धन्यवाद देते हुए केजरीवाल ने की और कहा, “आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। मैं विशेष रूप से उस न्यायाधीश को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने दबाव के बावजूद साहस दिखाया और सच्चाई का साथ दिया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरा मामला केवल अनुमानों और झूठी गवाहियों पर आधारित था।” उन्होंने अदालत में उनका प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी टीम के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा ईमानदारी पर आधारित है। उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन में पैसा नहीं कमाया; मैंने ईमानदारी कमाई है। आज अदालत के फैसले ने साबित कर दिया है कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार हैं, मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार हैं, संजय सिंह कट्टर ईमानदार हैं और आम आदमी पार्टी एक ईमानदार पार्टी है।”

जेल से रिहा होने के बाद अपनी चुप्पी के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “लोगों ने पूछा कि जेल से बाहर आने के बाद मैं चुप क्यों रहा। मैं सिर्फ एक राजनेता नहीं हूं; जब मुझे जेल होती है और मेरे परिवार को निशाना बनाया जाता है तो यह मुझे भी प्रभावित करता है। मैंने फैसला किया था कि मैं पूरे देश के सामने निर्दोष साबित होने के बाद ही बोलूंगा। आज मेरे दिल से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया है।”

 

पुलिस के यक्ष पोर्टल के जरिए मुकदमा दर्ज लोगों पर रहेगी खाकी की पहली नजर

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– मुकदमे दर्ज व्यक्तियों का सत्यापन अब अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) द्वारा संचालित यक्ष पोर्टल (Yaksha portal) पर किए गए ताज़ा अपडेट के तहत अब उन व्यक्तियों का भी डिजिटल सत्यापन किया जा रहा है, जिनके विरुद्ध विभिन्न थानों में मुकदमे दर्ज हैं। यह प्रक्रिया कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और संवेदनशील मामलों की निगरानी को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है।

पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार अब संबंधित थानों को ऐसे व्यक्तियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य किया गया है। इसमें उनकी वर्तमान स्थिति, निवास सत्यापन, न्यायालय में लंबित प्रकरण और अन्य आवश्यक विवरण शामिल किए जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था के तहत मुकदमे दर्ज आरोपियों का डिजिटल सत्यापन से केस स्टेटस और गतिविधियों की ऑनलाइन एंट्री, संवेदनशील/वांछित व्यक्तियों की नियमित मॉनिटरिंग होगी।

अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस की वैधानिक बाध्यता (स्टेटटरी ओब्लिगेशन ) का हिस्सा है। कानून के अनुसार जिन व्यक्तियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, उनकी गतिविधियों और उपस्थिति का सत्यापन समय-समय पर किया जाना आवश्यक है।

इस डिजिटल पहल से पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ अपराध की पुनरावृत्ति रोकने और संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से जवाबदेही मजबूत होगी और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलेगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘मीडिया ट्रायल’ का लगाया आरोप

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वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Avimukteshwaranand Saraswati) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) द्वारा फैसला सुरक्षित रखने और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके खिलाफ मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैसला अदालत के बाहर सुनाया जा रहा था, लेकिन आज सच्चाई की जीत हुई है।

शंकराचार्य ने कहा, “अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश ने हमारे इस तर्क को सही पाया कि मामला मनगढ़ंत था, और इसलिए यह आदेश पारित किया गया। न्यायाधीश ने हमारी बात समझी। बटुक के आश्रम में रहने की जो व्यापक रूप से प्रचारित खबरें अब तक फैलाई जा रही थीं, वे साबित नहीं हो सकीं। एक झूठी कहानी गढ़कर पूरे देश को गुमराह किया गया।”

उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने “अदालत में सीडी का जिक्र तक नहीं किया। सबूत पेश किए जा सकते थे। इसका मतलब है कि मीडिया में सीडी का इस्तेमाल करके ट्रायल चलाया जा रहा था, और फैसला अदालत के बाहर सुनाया जा रहा था। मानहानि की कार्यवाही पर आगे विचार किया जाएगा।” शंकराचार्य ने कहा कि वे शुरू से ही जांच में पुलिस के साथ सहयोग करने के इच्छुक रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।

उन्होंने पूछा, “हाई कोर्ट के आज के फैसले के अनुसार पुलिस स्तर पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? बच्चों को किशोर सुधारगृह क्यों नहीं भेजा गया? बच्चों की उचित हिरासत की मांग की गई थी, और आज अदालत में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।” उन्होंने आगे कहा, “हर कोई किसी के वश में नहीं रह सकता। कहीं न कहीं कोई न कोई ऐसा होता है जो सही और गलत को समझता है।

आज देश की जनता को सच्चाई पता चल गई है। मैंने शुरू से ही दो बातें कही थीं: मेरा बच्चों से कोई संबंध नहीं है। पीओसीएसओ अधिनियम के तहत एक आपराधिक रिकॉर्ड वाले अपराधी की हिरासत में बच्चे कैसे हो सकते हैं? बच्चे परीक्षा दे रहे हैं, और मुझ पर आरोप लगाया गया है।” देश भर के लोग अदालत की कार्यवाही ऑनलाइन देख रहे थे।

RIMS, के निदेशक प्रो. राजकुमार की घोषणा — जीवन न बचने पर 5 हजार की अंतिम संस्कार सहायता

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– गंभीर मरीजों के बेहतर उपचार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

रांची: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची के निदेशक प्रोफेसर राजकुमार (Director Prof. Rajkumar) ने घोषणा की है कि संस्थान जटिल एवं गंभीर मरीजों के उपचार में अपनी सर्वोत्तम चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रिम्स का लक्ष्य केवल इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि मरीज और उनके परिजनों को मानवीय संवेदनाओं के साथ सहयोग देना भी है।

निदेशक ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम आधुनिक संसाधनों और समर्पित देखभाल के माध्यम से गंभीर रोगियों का उपचार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक जीवन बचाए जा सकें।

प्रो. राजकुमार ने यह भी जानकारी दी कि यदि तमाम प्रयासों के बावजूद किसी मरीज का जीवन नहीं बचाया जा सके, तो संस्थान की ओर से अंतिम संस्कार के लिए ₹5000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही, दिवंगत व्यक्ति के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक रिम्स के वाहन से उनके गृह जनपद तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह पहल संस्थान की मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व को दर्शाती है। रिम्स रांची न केवल चिकित्सा सेवाओं में अग्रणी है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों के परिवार के साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है।