(महेन्द्र कुमार शर्मा -विनायक फीचर्स)
पंजाब (Punjab) की जटिल राजनीति में विराट कांत का BJP में प्रवेश केवल एक राज्य की घटना नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे मोदी सरकार के उस ‘विजन’ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ वे ऐतिहासिक राष्ट्रवादी विरासत को आधुनिक युवा नेतृत्व के साथ जोड़ रहे हैं। विश्लेषक विराट कांत को ‘उत्तर का तेजस्वी सूर्या’ कह रहे हैं। एक ऐसा चेहरा जिसमें बौद्धिक प्रखरता भी है और महान राष्ट्रवादी डीएनए भी।
विराट कांत उस परिवार से आते हैं जिसने भारत की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक जड़ों को सींचा है। वे भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत के पोते और ‘पंजाब के गांधी’ कहे जाने वाले स्वतंत्रता सेनानी लाला अचिंत राम के पड़पोते हैं। लाला अचिंत राम संविधान सभा के सदस्य थे, जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी थी।
विराट के लिए यह विरासत कोई ‘प्रिविलेज’ नहीं, बल्कि एक कठिन मार्ग है। वे बड़े गर्व और जिम्मेदारी से कहते हैं, “मेरे परिवार ने पीढ़ियों से देश की सेवा की है, और वही सेवा का जज्बा आज मेरा मार्गदर्शन कर रहा है।” आज का युवा, जो केवल सत्ता के पीछे भागने वाले नेताओं से ऊब चुका है, विराट की इस “सेवा प्रथम” वाली विचारधारा में एक नई उम्मीद देख रहा है। यही कारण है कि मोदी कैंप उन्हें पंजाब से लेकर दिल्ली तक एक राष्ट्रीय युवा आइकन के रूप में पेश कर रहा है।
विराट के भाजपा में आने पर कई सवाल भी उठे, क्योंकि उनके दादा कृष्ण कांत जी ने 1970 के दशक में मूल्यों की राजनीति के लिए कड़े स्टैंड लिए थे। विराट इस पर एक बहुत ही परिपक्व विश्लेषण पेश करते हैं। वे इसे विचारधारा से हटना नहीं, बल्कि उसका ‘विकास’ मानते हैं। विराट का तर्क है, “मेरे दादाजी ने अपने दौर की चुनौतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। आज की सच्चाई यह है कि भारत को एक मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है।” वे मानते हैं कि ईमानदारी और राष्ट्रवाद के जिन मूल्यों के लिए उनके पूर्वजों ने अपना जीवन समर्पित किया, आज उन्हें केवल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही पूरा किया जा सकता है।
विराट कांत केवल अपनी विरासत के कारण चर्चा में नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी योग्यता भी काफी प्रभावशाली है। दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स और पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून (LL.B) की पढ़ाई करने वाले विराट एक प्रखर वकील हैं। प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी। विराट बताते हैं कि पीएम मोदी ने उनसे घंटों इस बात पर चर्चा की कि कैसे युवाओं को नीति-निर्माण में आगे आना चाहिए। प्रधानमंत्री का मंत्र “विश्वास के साथ बड़ी जिम्मेदारी आती है”आज विराट के राजनीतिक जीवन का आधार बन गया है।
पंजाब आज नशीले पदार्थों, कर्ज और माफिया राज के एक ऐसे भंवर में फंसा है, जहाँ से निकलने के लिए उसे एक नए विजन की जरूरत है। विराट कांत वर्तमान ‘आप’ सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहते हैं कि “आज ऐसा लगता है जैसे माफिया नेटवर्क सरकार चला रहा है और राज्य की सत्ता कमजोर पड़ गई है।” वे केवल आलोचना नहीं करते, बल्कि समाधान भी देते हैं। वे स्वतंत्र पुलिसिंग, आधुनिक तकनीक और कृषि विविधीकरण की बात करते हैं। किसानों के मुद्दे पर वे कहते हैं कि एमएसपी की सुरक्षा के साथ-साथ हमें खेती को वैश्विक बाजार के लिए तैयार करना होगा।
विराट कांत का भाजपा में उदय इस बात का संकेत है कि पार्टी अब उन शिक्षित और राष्ट्रवादी युवाओं को आगे बढ़ा रही है जो अपनी जड़ों से जुड़े हैं। वे उस ‘न्यू इंडिया’ के प्रतीक हैं जो अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करता है और भविष्य की चुनौतियों से लड़ने का दम रखता है। विराट का कहना है कि वे केवल नाम के सहारे नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके जनता का विश्वास जीतेंगे। आने वाले समय में, विराट कांत न केवल पंजाब बल्कि पूरे भारत में भाजपा के एक प्रखर और ओजस्वी चेहरे के रूप में दिखाई देंगे।
(विनायक फीचर्स)








