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Saturday, March 7, 2026
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ग्राम समाज की भूमि पर अवैध निर्माण का प्रयास, दो लोग हिरासत में, शांति भंग की कार्रवाई कर न्यायालय में किया पेश

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शमशाबाद, फर्रुखाबाद। ग्राम समाज की जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू करने के आरोप में शमशाबाद थाना पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर शांति भंग की कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश किया।

जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम अचानकपुर निवासी राम आसरे एवं रमाकांत पर आरोप है कि वे ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से निर्माण कार्य करा रहे थे। बताया जाता है कि निर्माण कार्य की सूचना ग्रामीणों ने क्षेत्रीय लेखपाल को दी।

सूचना मिलते ही क्षेत्रीय लेखपाल रोहित अवस्थी मौके पर पहुंचे, जहां निर्माण कार्य जारी पाया गया। स्थिति को गंभीर देखते हुए लेखपाल ने शमशाबाद थाना पुलिस को अवगत कराया। सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने मौके से दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने दोनों के खिलाफ शांति भंग की आशंका में कार्रवाई करते हुए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूर्ण की और उन्हें न्यायालय में पेश किया।

उत्तर प्रदेश पुलिस फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में होम्योपैथिक वामा वेलनेस कैम्प आयोजित

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पुलिस लाइन स्थित अस्पताल में पुलिसकर्मियों एवं परिजनों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण

फतेहगढ़। उत्तर प्रदेश पुलिस फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में पुलिस लाइन स्थित अस्पताल परिसर में होम्योपैथिक “वामा वेलनेस कैम्प” का सफल आयोजन किया गया। इस स्वास्थ्य शिविर का उद्देश्य पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा।

कैम्प के दौरान पुलिस विभाग में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों तथा उनके परिजनों का विस्तृत चिकित्सीय परीक्षण किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विभिन्न सामान्य एवं दीर्घकालिक रोगों की जांच कर आवश्यक परामर्श प्रदान किया गया। इसके साथ ही मरीजों को होम्योपैथिक औषधियां निःशुल्क वितरित की गईं।

शिविर में रक्तचाप, मधुमेह, त्वचा संबंधी समस्याएं, जोड़ों के दर्द एवं अन्य सामान्य बीमारियों की जांच की गई। उपस्थित चिकित्सकों ने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के वेलनेस कैम्प पुलिस परिवार के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में पुलिस लाइन के चिकित्सकीय स्टाफ एवं स्वयंसेवकों का विशेष सहयोग रहा।

सीएम योगी के मार्गदर्शन में काशी ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

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एक घंटे में रोपे 2,51,446 पौधे, चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त

ड्रोन कैमरों और डिजिटल गणना तंत्र के जरिए सटीक पुष्टि के बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने नए रिकॉर्ड की घोषणा की

सेना, एनडीआरएफ, पुलिस, शिक्षक और हजारों विद्यार्थियों के योगदान से सुजाबाद डोमरी बना ‘ऑक्सीजन बैंक’

वाराणसी/लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में काशी ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर रविवार को एक नया इतिहास दर्ज कर दिया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे की समयावधि में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। मौके पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा। महापौर ने कहा कि यह महान उपलब्धि पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन से संभव हो सकी।

इस ऐतिहासिक पल को दर्ज करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम सुबह से ही डोमरी में मौजूद रही। नगर निगम और विभिन्न सामाजिक व सरकारी संस्थाओं के समन्वय से सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है ।

चीन का रिकॉर्ड ध्वस्त, भारत ने अपने नाम किया रिकॉर्ड

10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था। रविवार को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक ऋषि नाथ और विश्व रिकॉर्ड रणनीतिकार निश्चल बारोट ने मौके पर मौजूद रहकर प्रत्येक गतिविधि की निगरानी की। ड्रोन कैमरों और आधुनिक डिजिटल गणना तंत्र के जरिए हुई सटीक पुष्टि के बाद ऋषि नाथ ने आधिकारिक रूप से इस नए रिकॉर्ड की घोषणा की।

60 गंगा घाटों की प्रतिकृति बना ‘शहरी वन’

इस ‘शहरी वन’ की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट और वैचारिक पृष्ठभूमि है। पूरे वन क्षेत्र को 60 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे -दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, मणिकर्णिका घाट, केदार घाट, चौसट्टी घाट, मान मंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है। यह बनावट ऐसी है कि भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे, तो गंगा किनारे एक हरा-भरा ‘मिनी काशी’ का स्वरूप नजर आएगा।

प्रत्येक सेक्टर में लगभग 4,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इनमें शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद और पपीता जैसे फलदार वृक्षों और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधियों को प्राथमिकता दी गई है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण को सुधारेगी, बल्कि आने वाले समय में नगर निगम के लिए आय का एक बड़ा स्रोत भी बनेगी।

पौधरोपण के लिए जनभागीदारी का महाकुंभ

इस विश्व रिकॉर्ड को बनाने के पीछे महीनों की तैयारी और हजारों हाथों का सामूहिक श्रम शामिल है। रविवार की सुबह से ही डोमरी में भारी उत्साह का माहौल रहा। इस महाभियान में बड़ी संख्या में स्कूल-कालेजों के अलावा कई संस्थाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।

पुलिस एवं सैन्य बल रहा तैनात

भारतीय सेना के 39 जीटीसी, 34 जीटीसी, 39 जीआर, और 137 सीएफटीएफ (टीए) के जवानों ने अनुशासन की मिसाल पेश की। वहीं एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) और उत्तर प्रदेश पुलिस की 36वीं व 39वीं वाहिनी पीएसी के जवानों ने पूरी ऊर्जा के साथ पौधरोपण किया।

छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा

नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश वन विभाग, कृषि विभाग, डूडा और नगर निगम की टीमों ने तकनीकी प्रबंधन और सिंचाई की व्यवस्था संभाली। काशी विद्यापीठ, यूपी कालेज, देहरादून पब्लिक स्कूल, मुकुलारेंडम स्कूल के हजारों छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस के स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम को एक जन-आंदोलन में बदल दिया।

सिंचाई की स्मार्ट तकनीक

इन पौधों को जीवित रखने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। वन क्षेत्र में 10,827 मीटर लंबी अत्याधुनिक पाइपलाइन बिछाई गई है। 10 बोरवेल और 360 ‘रेन गन’ सिस्टम के जरिए सिंचाई की ऐसी व्यवस्था की गई है कि पानी की बर्बादी न हो। मियावाकी तकनीक के कारण ये पौधे सामान्य की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ेंगे और मात्र दो से तीन वर्षों में यह क्षेत्र एक सघन ‘ऑक्सीजन बैंक’ का रूप ले लेगा। जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक कम जगह में घना जंगल उगाने के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

यह परियोजना केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुँच सकती है।

पौधरोपण के दौरान मौजूद गणमान्य

कार्यक्रम के दौरान बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी , महापौर अशोक कुमार तिवारी, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र राय, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, अश्वनी त्यागी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल व श्याम भूषण शर्मा उपस्थित रहे। महापौर ने कहा कि यह आध्यात्मिक शांति और आधुनिक अर्थशास्त्र का एक अनूठा उदाहरण है। प्रशासन की टीमें स्थल पर डटी रहीं और अंततः काशी ने विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि काशी न केवल अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है, बल्कि पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। ढाई लाख पौधों की यह नई सौगात काशी के माथे पर एक और गौरवपूर्ण तिलक है।

-अशोक कुमार तिवारी

महापौर

दिल्ली की महिलाओं को तोहफा : डीटीसी बसों में फ्री सफर के लिए राष्ट्रपति जारी करेंगी पिंक मोबिलिटी कार्ड

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार (Central government) की ‘वन नेशन, वन कार्ड’ से प्रेरणा लेते हुए दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार राजधानी की महिला निवासियों के लिए नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) की शुरुआत करने जा रही है। सोमवार 2 मार्च को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में एक विशेष व भव्य कार्यक्रम ‘सशक्त नारी समृद्ध दिल्ली’ में देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इस महत्वाकांक्षी योजना (पिंक कार्ड) का शुभारंभ करेंगी।

मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता का कहना है कि यह कार्ड दिल्ली निवासी महिलाओं को डीटीसी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान करेगा। साथ ही मेट्रो, रीजनल रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में एक ही स्मार्ट कार्ड के माध्यम से सशुल्क सुविधा देगा। मुख्यमंत्री के अनुसार यह पहल सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं के दैनिक यात्रा खर्च में कमी आएगी और उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य तथा सामाजिक अवसरों तक सुगम पहुंच मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के तहत तीन प्रकार के एनसीएमसी कार्ड जारी किए जाएंगे। पिंक कार्ड दिल्ली निवासी पात्र महिलाओं के लिए होगा, जबकि ब्लू कार्ड सामान्य यात्रियों के लिए और ऑरेंज कार्ड मासिक पास उपयोगकर्ताओं के लिए जारी किया जाएगा। शुरुआती चरण में पिंक और ब्लू कार्ड लॉन्च किए जाएंगे, जिसके बाद ऑरेंज कार्ड लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार कार्ड जारी करने के लिए लगभग 50 केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और एसडीएम कार्यालयों के साथ-साथ डीटीसी के चयनित केंद्र शामिल होंगे। यह कार्ड न्यूनतम दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा ताकि प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी रहे। प्रत्येक पिंक कार्ड लाभार्थी के मोबाइल नंबर और आधार से लिंक किया जाएगा। आधार के माध्यम से प्रमाणीकरण कर आयु (5 वर्ष से अधिक), लिंग (महिला) और दिल्ली निवास (दिल्ली पिन कोड के आधार पर) की पुष्टि की जाएगी, जिससे पात्रता सुनिश्चित होगी और डुप्लिकेशन रोका जा सकेगा।

पुलिस लाइन फतेहगढ़ में रिक्रूट आरक्षियों की 10 किमी क्रॉस कंट्री दौड़ आयोजित

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फतेहगढ़। पुलिस लाइन फतेहगढ़ में प्रशिक्षणरत रिक्रूट आरक्षियों के आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आज दिनांक 01.03.2026 को आउटडोर परीक्षा के क्रम में 10 किलोमीटर क्रॉस कंट्री दौड़ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम क्षेत्राधिकारी नगर एवं क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आरक्षियों की शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति, अनुशासन एवं मानसिक दृढ़ता का परीक्षण करना था। प्रातः निर्धारित समय पर सभी रिक्रूट आरक्षी पूर्ण उत्साह एवं जोश के साथ दौड़ में शामिल हुए। अधिकारियों द्वारा निर्धारित मार्ग पर सुरक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं।

दौड़ के दौरान अधिकारियों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। सफलतापूर्वक दौड़ पूर्ण करने वाले रिक्रूट आरक्षियों की सराहना की गई तथा उन्हें भविष्य में भी अनुशासन और परिश्रम बनाए रखने का संदेश दिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस प्रकार की परीक्षाएं पुलिस बल को शारीरिक रूप से सुदृढ़, तत्पर एवं कर्तव्यनिष्ठ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तुरंत हस्तक्षेप कर बढ़ते हुए युद्ध को रोकने की अपील की।

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वैश्विक समुदाय से एक तात्कालिक अपील करते हुए, ज्यूडिशियल काउंसिल ने औपचारिक रूप से यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी कौंसिल को पत्र लिखकर संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के बीच तेजी से बढ़ते सैन्य टकराव को रोकने के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। परिषद के पत्र में इस संघर्ष के विनाशकारी मानवीय, कानूनी और भू-राजनीतिक परिणामों पर जोर देते हुए कहा गया है कि आगे जान-माल की हानि रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून की रूपरेखा को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।

ज्यूडिशियल काउंसिल की यह अपील एक अत्यंत संवेदनशील समय पर आई है। 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के भीतर लक्ष्यों पर सैन्य हमलों की एक श्रृंखला शुरू की, जिसमें उसके सर्वोच्च नेता आयतुल्ला ख़ामेनेई और सैन्य कर्मियों की मृत्यु हो गई, जिससे मध्य पूर्व में शत्रुता में नाटकीय वृद्धि हुई। ईरान ने इसके जवाब में इज़राइली क्षेत्र और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों पर मिसाइल हमले किए, जिससे यह संघर्ष और अधिक खतरनाक रूप लेता हुआ वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन गया।

सुरक्षा परिषद को लिखे अपने पत्र में ज्यूडिशियल काउंसिल ने तत्काल युद्धविराम, सशक्त कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता की आवश्यकता पर बल दिया है। परिषद ने बिगड़ती मानवीय स्थिति, नागरिक हताहतों की बढ़ती संख्या और संघर्ष के मध्य पूर्व से बाहर फैलने के खतरे पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जो दशकों से शांति और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुरक्षित रखने के प्रयासों को कमजोर कर सकता है।

“हम अत्यंत गंभीर और खतरनाक समय के साक्षी हैं,” ज्यूडिशियल काउंसिल के अध्यक्ष राजीव अग्निहोत्री ने कहा। “दुनिया मूकदर्शक बनकर नहीं खड़ी रह सकती जबकि युद्ध पूरे क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हमारी अपील इस विश्वास पर आधारित है कि अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और शांति को सैन्य उग्रता पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हम नागरिकों की सुरक्षा, कानूनी मानकों की रक्षा और वार्ता के मार्ग को पुनः स्थापित करने के लिए तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की मांग करते हैं।”

ज्यूडिशियल काउंसिल के हस्तक्षेप में कई प्रमुख कानूनी और नैतिक बिंदुओं को रेखांकित किया गया है:

संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन: किसी भी राज्य द्वारा स्पष्ट आत्मरक्षा या सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना बल का प्रयोग, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकता है। ज्यूडिशियल काउंसिल ने जोर देकर कहा कि सभी पक्षों को अपने संधि दायित्वों का पालन करना चाहिए ताकि वैश्विक कानूनी मानकों का और ह्रास न हो।

मानवीय संरक्षण: हजारों नागरिकों के घायल या मृत होने की खबरें हैं, और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विनाश से मानवीय संकट गहराता जा रहा है। परिषद ने नागरिकों की सुरक्षा और निर्बाध मानवीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

व्यापक संघर्ष का जोखिम: यह बढ़ता तनाव क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों को एक बड़े टकराव में खींच सकता है, जिसके अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं।

कानूनी तर्कों के अतिरिक्त, ज्यूडिशियल काउंसिल के पत्र में हस्तक्षेप के लिए व्यापक नैतिक आधार भी प्रस्तुत किया गया है।

“इतिहास हमें आज लिए गए निर्णयों के आधार पर परखेगा,” ज्यूडिशियल काउंसिल के सचिव संजय अरोड़ा ने कहा। “हम सुरक्षा परिषद से साहस और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करने, अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करने और मानवता को अनियंत्रित युद्ध की भयावहता से बचाने की अपील करते हैं।”