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Saturday, April 11, 2026
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गौशालाओं की उपेक्षा, सरकार की किरकिरी – 50 लाख प्रतिमाह खर्च के बावजूद स्थिति दयनीय

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। गौशालाओं की स्थिति इस समय अत्यंत दयनीय हो गई है, जबकि सरकार प्रत्येक महीने गौवंश की देखभाल के लिए 50 लाख रुपये के करीब खर्च कर रही है। जिले की लगभग 30 गौशालाओं में कोई देखने-सुनने वाला नहीं है, और जिम्मेदार अधिकारी जानबूझ कर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह स्थिति सरकार की जनता के बीच किरकिरी का कारण बन रही है।
तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह के कार्यकाल में, फर्रुखाबाद की गौशालाओं के सौंदर्यीकरण की मुहिम छेड़ी गई थी। यह मुहिम मुख्यमंत्री को अत्यधिक पसंद आई थी, और उन्होंने फर्रुखाबाद की गौशालाओं को मॉडल मानकर पूरे प्रदेश में वहां जैसी खुबसूरत व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे। उस समय, गौशालाओं में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं, जिनमें स्वच्छता, हरे चारे की नियमित आपूर्ति, और पानी की समुचित व्यवस्था शामिल थी।
लेकिन वर्तमान में, इन गौशालाओं की स्थिति पुन: बदहाल हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, सरकार प्रत्येक महीने गौवंश की देखभाल के लिए 50 लाख रुपये के करीब खर्च करती है, फिर भी जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस है। कई गौशालाओं में चारे और पानी की उचित व्यवस्था नहीं है, और वहां रह रहे गौवंश की स्थिति दयनीय है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी जानबूझ कर गौशालाओं की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे सरकार की साख पर बट्टा लग रहा है। कई गौशालाओं में काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें वेतन समय पर नहीं मिलता, और न ही गौवंश की देखभाल के लिए आवश्यक संसाधन मुहैया कराए जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, फर्रुखाबाद की 30 गौशालाओं में लगभग 10000 से अधिक गौवंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कुछ गौशालाओं में तो बमुश्किल आधे गौवंश ही बचे हैं, और वे भी कुपोषण का शिकार हैं। गौशालाओं में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है, और बीमार गौवंश के लिए उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
फर्रुखाबाद के स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर काफी रोष है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा प्रतिमाह 50 लाख रुपये खर्च किए जाने के बावजूद गौशालाओं की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा है। वे मांग कर रहे हैं कि इस मामले की जांच की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
फर्रुखाबाद की गौशालाओं की यह दयनीय स्थिति एक गंभीर समस्या है, जो सरकार की नीतियों और कार्यान्वयन की विफलता को उजागर करती है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह न केवल गौवंश के लिए हानिकारक साबित होगा, बल्कि सरकार की साख को भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं, ताकि गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और जनता का भरोसा फिर से कायम हो सके।
इस संबंध में फर्रुखाबाद के डीएम डाक्टर वी के सिंह से बात करने का प्रयास किया गया,तो पता चला वो मीडिया से बात ही नही करते।हालांकि उनकी कार्यशैली तेजतर्रार अफसरों में है,लेकिन गोवंश की ओर उनका ध्यान नगण्य बताया गया।

आजादी विशेष: महात्मा गांधी को सबसे पहले किसने कहा था ‘राष्ट्रपिता’

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Mahatma Gandhi
Mahatma Gandhi

15 अगस्त वो तारीख है जब भारत ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से आजादी हासिल की थी। विदेशी ताकतों ने भारत के नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंपी थी। लेकिन इस आजादी के पीछे सैकड़ों लोगों का संघर्ष था। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन कुर्बान कर दिया। लेकिन उनमें से एक सेनानी को ‘राष्ट्रपिता’ का दर्जा हासिल है। आइए जानते हैं कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को सबसे पहले राष्ट्रपिता किसने कहा था।

मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था। अपने अहिंसावादी विचारों से उन्होंने पूरे विश्व की सोच बदल दी। गांधी जी द्वारा स्वतंत्रता और शांति के लिए शुरू की गई पहल ने भारत और दक्षिण अफ्रीका में कई ऐतिहासिक आंदोलनों को नई दिशा दिखाई। उनका पहला सत्याग्रह 1917 में बिहार के चंपारण जिले से शुरू हुआ था। उसके बाद से भारतीय राजनीति में महात्मा गांधी एक अहम शख्सियत बन गए।

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को राष्ट्रपिता किसने कहा?

आम राय है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सबसे पहले महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को राष्ट्रपिता कहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, गांधी जी के देहांत के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रेडियो के माध्यम से देश को संबोधित किया था और कहा था कि ‘राष्ट्रपिता अब नहीं रहे’। लेकिन उनसे पहले दूसरे कांग्रेस नेता ने महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहा था। यह थे सुभाष चंद्र बोस। दिलचस्प बात है कि नेताजी बोस के कांग्रेस से इस्तीफा देने की मूल वजह अप्रत्यक्ष रूप से महात्मा गांधी थे।

नेताजी बोस की जीत को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की हार माना गया

जनवरी 1939 को कांग्रेस अधिवेशन में अध्यक्ष पद का चुनाव होना था। पिछली बार यानी 1938 में सुभाष चंद्र बोस निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे। इस बार भी वो अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे थे। हालांकि, महात्मा गांधी इससे सहमत नहीं थे। वो चाहते थे कि जवाहर लाल नेहरू अध्यक्ष पद के लिए अपना नाम आगे करें। नेहरू के मना करने के बाद उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आजाद से आग्रह किया। लेकिन मौलाना स्वास्थ्य कारणों से पीछे हट गए। अंत में महात्मा गांधी ने आंध्र प्रदेश से आने वाले पट्टाभि सीतारमैय्या को अध्यक्ष पद के लिए आगे किया।

गांधी जी (Mahatma Gandhi) के समर्थन के बाद भी 29 जनवरी, 1939 को हुए चुनाव में पट्टाभि सीतारमैय्या को 1377 वोट मिले। जबकि नेताजी बोस को 1580 मिले। उस समय तक जवाहर लाल नेहरु के अपवाद को छोड़कर किसी अध्यक्ष को लगातार दूसरा कार्यकाल नहीं मिला था। पट्टाभि सीतारमैय्या की हार को गांधी की हार की तरह देखा गया।

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। अगले महीने 20-21 फरवरी 1939 को कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक वर्धा में हुई। स्वास्थ्य कारणों से सुभाष बाबू इसमें नहीं पहुंच पाए। उन्होंने पटेल से वार्षिक अधिवेशन तक बैठक टालने को कहा। इस पर पटेल, नेहरू समेत 13 सदस्यों ने सुभाष बाबू पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए वर्किंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया। उनका आरोप था कि बोस अपनी अनुपस्थिति में कांग्रेस के सामान्य कार्य को संचालित नहीं होने दे रहे।

चुनाव जीते, लेकिन फिर भी इस्तीफा दिया

इसके बाद 8 से 12 मार्च, 1939 तक त्रिपुरी (जबलपुर) में कांग्रेस का अधिवेशन रखा गया। इसमें आल इंडिया कांग्रेस कमिटी के 160 सदस्यों की तरफ से एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें लिखा था कि कांग्रेस गांधी के रास्ते पर ही आगे बढ़ेगी। इसने वर्किंग कमेटी चुनने का अधिकार भी अध्यक्ष से छीन लिया गया, जो कांग्रेस के संविधान में दिया हुआ था।

निर्वाचित अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस शक्ति विहीन हो चुके थे। पंडित नेहरु ने उनसे वर्किंग कमेटी के सदस्यों को ‘हीन बुद्धि कहने’ के लिए माफी मांगने को कहा। लेकिन सुभाष बोस झुकने को तैयार नहीं थे। नेहरु ने उनसे कार्यकाल पूरा करने को कहा। मगर उन्होंने इस्तीफा देना बेहतर समझा।

मतभेद के बाद भी राष्ट्रपिता माना

सुभाष बोस गांधी जी का बहुत आदर करते थे। लेकिन उनके लिए गांधी जी की इच्छा अंतिम फैसला नहीं था। 1940 में कांग्रेस की योजनाओं से अलग रहकर काम करते सुभाष बाबू गिरफ्तार हो गए। 9 जुलाई 1940 को सेवाग्राम में गांधी जी ने कहा,’सुभाष बाबू जैसे महान व्यक्ति की गिरफ्तारी मामूली बात नहीं है, लेकिन सुभाष बाबू ने अपनी लड़ाई की योजना बहुत समझ-बूझ और हिम्मत से बनाई है।’

अंग्रेजों के चंगुल से बचकर जुलाई 1943 में सुभाष चंद्र बोस जर्मनी से जापान के नियंत्रण वाले सिंगापुर पहुंचे थे। 4 जून 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुए महात्मा गांधी को देश का पिता (राष्ट्रपिता) कहकर संबोधित किया।

सुभाष बोस ने कहा, ’भारत की आजादी की आखिरी लड़ाई शुरु हो चुकी है। ये हथियारबंद संघर्ष तब तक चलेगा, जब तक ब्रिटिश को देश से उखाड़ नहीं देंगे।’ थोड़ी देर रुककर उन्होंने कहा ‘राष्ट्रपिता , हिंदुस्तान की आजादी की लड़ाई में हम आपका आशीर्वाद मांगते हैं।’

गांधी जी (Mahatma Gandhi) ने सुभाष बोस की विमान दुर्घटना की मृत्यु की खबर पर कहा था,’उन जैसा दूसरा देशभक्त नहीं, वह देशभक्तों के राजकुमार थे।’ 24 फरवरी 1946 को अपनी पत्रिका ‘हरिजन’ में लिखा,’आजाद हिंद फौज का जादू हम पर छा गया है। नेताजी का नाम सारे देश में गूंज रहा है। वे अनन्य देश भक्त थे। उनकी बहादुरी उनके सारे कामों में चमक रही है।

Raksha Bandhan 2024: राशि के अनुसार बांधें भाई को राखी

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Raksha Bandhan
Raksha Bandhan

भाई बहन के प्रेम के प्रतीक का त्योहार रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) हर साल सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन सावन माह का अंतिम दिन होता है। इस बार रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) पर्व 19 अगस्त को मनाया जाने वाला है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसके मंगल भविष्य की कामना करती हैं।

वहीं, भाई भी अपनी बहन को रक्षा करने का वचन देते हैं। इसके साथ ही कुछ उपहार भी देते हैं। अपने भाई को कौन-सी राखी बांधनी चाहिए। इसके लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ बातें बताई गई हैं। अगर आप अपने भाई को उसकी राशि के अनुसार राखी बांधती हैं, तो उससे विशेष प्रकार का लाभ प्राप्त होता है।

मेष राशि

अगर आपके भाई की राशि मेष है, तो आप अपने भाई को लाल रंग की राखी बांध सकते हैं। मेष राशि के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव होता है। ऐसे में लाल रंग उनके जीवन में ऊर्जा का संचार करता है।

वृषभ राशि

अगर आपके भाई की राशि वृषभ है, तो आप उसे नीले रंग की राखी बांध सकते हैं। नीले रंग की राखी आपके भाई के जीवन में शुभ परिणाम लेकर आएगी।

मिथुन राशि

अगर आपके भाई की राशि मिथुन है, तो आप उसे हरे रंग की राखी बांध सकते हैं, क्योंकि मिथुन राशि वालों पर बुध ग्रह का प्रभाव होता है। ऐसे लोगों के लिए हरा रंग भाग्यशाली होता है।

कर्क राशि

अगर आपके भाई की राशि कर्क है, तो आप उसे सफेद रंग की राखी बांध सकते हैं, क्योंकि कर्क राशि वालों पर चंद्रमा का प्रभाव होता है। ऐसे में सफेद रंग की राशि कर्क राशि वालों के लिए शुभ होगी।

सिंह राशि

अगर आपके भाई की राशि सिंह है, तो आप उसे लाल या पीले रंग की राखी बांध सकते हैं। सिंह राशि वालों पर सूर्य का प्रभाव होता है, इसलिए लाल या पीला रंग इन राशि वालों के लिए शुभ होगा।

कन्या राशि

अगर आपके भाई की राशि कन्या है, तो आप अपने भाई को गहरे हरे रंग की राखी बांध सकते हैं। कन्या राशि वालों पर बुध का प्रभाव होता है। ऐसे में हरे रंग की राखी पहनने पर आपके भाई को जीवन में सफलता प्राप्त होगी।

तुला राशि

अगर आपके भाई की राशि तुला है, तो आप उसकी कलाई पर गुलाबी रंग की राखी बांध सकते हैं। तुला राशि का स्वामी शुक्र होता है। ऐसे में इस राशि वालों को गुलाबी रंग की राखी पहनने से काफी लाभ मिलता है।

वृश्चिक राशि

अगर आपके भाई की राशि वृश्चिक है, तो आप उसे मेहरून रंग की राखी बांध सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों पर मंगल ग्रह का प्रभाव होता है। ऐसे में मेहरून रंग की राखी पहनने से आपके भाई को संकटों से छुटकारा मिलेगा।

धनु राशि

अगर आपके भाई की राशि धनु है, तो आपको अपने भाई की कलाई पर पीले रंग की राखी बांधनी चाहिए। धनु राशि वालों पर शुक्र ग्रह का प्रभाव होता है। ऐसे में इस रंग की राखी उनके लिए लाभकारी साबित होगी।

मकर राशि

अगर आपके भाई की राशि मकर है, तो आप उसे नीले रंग की राखी बांध सकते हैं। मकर राशि वालों पर शनि का प्रभाव होता है। ऐसे में नीले रंग की राखी उसके लिए जीवन में सफलता लेकर आएगी।

कुंभ राशि

अगर आपके भाई की राशि कुंभ है, तो आप अपने भाई को गहरे हरे रंग की राखी बांध सकते हैं। गहरे हरे रंग की राखी पहनने से कुंभ राशि वालों को जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

मीन राशि

अगर आपके भाई की राशि मीन है, तो आप उसे पीले रंग की राखी बांध सकते हैं। इस राशि के लोगों पर शुक्र का प्रभाव होता है। ऐसे में पीला रंग आपके भाई के लिए बहुत लाभकारी साबित होगा और उसे बीमारियों से दूर रखेगा।

जन्माष्टमी पर करें ये खास उपाय, संतान प्राप्ति समेत मिलेंगे कई लाभ

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Janmashtami
Janmashtami

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami) के मौके पर कान्हा की विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ व्रत भी रखा जाता है। इस दिन बाल गोपाल के जन्मोत्सव के साथ-साथ कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्री कृष्ण से जुड़े कुछ खास उपाय जन्माष्टमी के दिन कर लिए जाएं, तो सुख-समृद्धि और धन-संपदा में वृद्धि होती है। साथ ही मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करने से कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।

जन्माष्टमी (Janmashtami) 2024 तिथि

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 25 अगस्त 2024 रविवार को दोपहर 3 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी। वहीं इसका समापन 26 अगस्त 2024 दिन सोमवार को दोपहर 2 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी।

जन्माष्टमी (Janmashtami) पर करें ये उपाय

पंचामृत से अभिषेक करें

जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें लाल वस्त्र पहनाएं। इसके बाद उन्हें झूले में बैठाएं और 27 बार झूला झुलाएं।

गुलाबी वस्त्र अर्पित करें

जन्माष्टमी (Janmashtami) के खास दिन पर कान्हा को गुलाबी रंग के वस्त्र अर्पित करें। इसके साथ ही थोड़ा सा इत्र भी उन्हें छिड़कें। कहा जाता है कि कान्हा को सुगंधित इत्र बहुत पसंद है। इसके बाद उन्हें 9 बार झूला झुलाएं।

केले का पौधा लगाएं

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जन्माष्टमी (Janmashtami) के मौके पर केले का पौधा लगाएं। इसके साथ ही इसकी नियमित रूप से पूजा-पाठ भी करें। ऐसा करने से आपको भगवान विष्णु का आशीर्वाद भी मिलेगा।

संतान प्राप्ति के लिए उपाय

संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी (Janmashtami) के खास मौके पर कान्हा का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके साथ ही उन्हें पीले फूल, माला और वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाएं। अंत में ‘ऊं क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जाप करें।

तुलसी की विधिवत पूजा करें

जन्माष्टमी (Janmashtami) के दिन मां तुलसी की विधिवत पूजा करनी चाहिए। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक भी जलाएं।

सफलता प्राप्त करने के लिए

अगर नौकरी में पदोन्नति चाहते हैं या फिर बिजनेस में अपार सफलता के साथ धन लाभ चाहते हैं, तो जन्माष्टमी के मौके पर भगवान कृष्ण को सफेद चंदन चढ़ाएं। इसके साथ ही गुलाबों से बनी फूल माला चढ़ाएं। उन्हें सफेद रंग के वस्त्र धारण कराने के साथ झूला भी झुलाएं।

तुलसी दल जरूर शामिल करें

भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय है। ऐसे में भगवान कृष्ण को भोग लगाते समय तुलसी दल जरूर रखें। इससे वह जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।

महिला ने दिए अनोखे जुड़वां बच्चों को जन्म, देखकर डॉक्टर भी हो गए हैरान

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Twins
Twins

पटना। सासाराम के चेनारी नगर पंचायत के एक निजी अस्पताल में एक मह‍िला ने शनिवार को शरीर से जुड़े अनोखे जुड़वां (Twins)  बच्चे को जन्म दिया। इन बच्चों के दो अलग-अलग सिर हैं। हाथ और पैर भी दो-दो हैं। सिर्फ दोनों का पेट आपस में जुड़ा हुआ है। ऐसे बच्चे के जन्म होने पर अस्पताल में देखने वालों की भीड़ जुट गई। कुछ लोग इसे कुदरत का करिश्मा तो, कुछ भगवान का अवतार बता रहे हैं।

प्रखंड क्षेत्र की मल्हीपुर गांव निवासी शांतु पासवान की पत्नी प्रसव पीड़ा होने पर शुक्रवार की रात चेनारी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। सुबह 11 बजे उसने एक अनोखे जुड़वां बच्चे (Twins)  को जन्म दिया। बच्चे के जन्म होते ही नर्सों और चिकित्सकों के बीच चर्चा शुरू हो गयी।

दोनों बच्चों का आपस में जुड़ा है पेट

नर्सों ने परिजनों को इस बात की जानकारी दी कि बच्चे सामान्य नहीं है बल्कि एक अनोखे हैं। अनोखे जुड़वां (Twins) बच्चों के जन्म लेने की बात पूरे अस्पताल में फैल गई। देखते ही देखते लोगों की भीड़ वहां जुट गई।लोग इसे कुदरत का करिश्मा मान रहे थे। बच्चे को देखने के लोगों की भीड़ बढ़ ही रही थी। दोनों बच्चों का एक ही पेट है।

सुरक्षित हैं दोनों बच्चे

अभी तक शरीर से जुड़े जुड़वां बच्चे सुरक्षित हैं। हालांकि परिजन बड़े डॉक्टर को दिखाने के लिए दूसरे डॉक्टर से संपर्क में है। बच्चों के पिता शांतु पासवान ने कहा कि दोनों बच्चे सुरक्षित हैं। ऐसे बच्चे के जन्म से डॉक्टरों की टीम हैरान है। इस तरह से जुड़े हुए बच्चे का जन्म ऑपरेशन के जरिए हुआ।

अनोखे जुड़वां (Twins)  को देख डॉक्टर भी हैरान

डॉक्टर का कहना है कि इस तरह के बच्चे कम समय तक ही जीवित रह पाते हैं। पेट में कम जगह होने की वजह से खाल जुड़ जाती है और बच्चा पनप नहीं पाता है। इसी वजह से इस प्रकार के बच्चों का जन्म होता है। बच्चे को सासाराम के सदर अस्पताल के SNSU वार्ड में भर्ती कराया गया। फिर उसके बाद पटना रेफर कर दिया गया है।

बुखार से बच्ची की मौत, मचा कोहराम

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यूथ इंडिया संवाददाता
कायमगंज। जनपद कासगंज क्षेत्र के एक गांव में बुखार से बच्ची की मौत हो गई। मौत पर परिवार में कोहराम मच गया। बच्ची को तीन दिन से बुखार आ रहा था। उसका प्राइवेट इलाज चल रहा था।
जनपद कासगंज के थाना दरियावगंज के गांव हाकिमगंज निवासी अजीत की 4 वर्षीय शकुंतला को गंभीर हालत में परिजन सीएचसी लाए। जहां डाक्टर विपिन कुमार ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों में कोहराम मच गया है। उनका रो-रो कर बुरा हाल था। परिजनों ने बताया कि 3 दिन पहले उसे बुखार आया था। उसका प्राइवेट इलाज चल रहा था। उसकी हालत शनिवार को उसकी हालत बिगड़ गई। उसे सीएचसी लाए थे।
नवजात की मौत, मचा कोहराम
कायमगंज। क्षेत्र के गांव अरियारा निवासी विकास की तीन दिन की बच्ची की अचानक हालत बिगड़ गई। परिजन सीएचसी लेकर दौड़े। जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत पर परिवार में कोहराम मच गया।