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Friday, February 13, 2026
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वतन लौटकर भावुक हुईं विनेश, गले मिलते ही मां भी रो पड़ीं; Video

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Vinesh Phogat
Vinesh Phogat

भारतीय रेसलर विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) ने पेरिस ओलंपिक 2024 में शानदार प्रदर्शन किया था। विनेश 50 किलो कुश्ती स्पर्धा के फाइनल में पहुंची थीं। हालांकि फाइनल से पहले उनका वजन 100 ग्राम अधिक पाया गया था, जिसके चलते उन्हें डिस्क्वालिफाई कर दिया गया। विनेश फोगाट ने खुद को अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ कोर्ट ऑफ अर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में अपील की और मांग की कि उन्हें संयुक्त रजत पदक दिया जाए। हालांकि CAS ने स्टार रेसलर विनेश फोगाट की अपील खारिज कर दी।

मां और दोस्तों से मिलकर रो पड़ीं विनेश (Vinesh Phogat) 

पेरिस से वापस लौटने पर विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) का दिल्ली एयरपोर्ट पर जबरदस्त स्वागत हुआ। शायद ही विनेश ने भी ऐसी उम्मीद की होगी लेकिन उनका परिवार, उनके दोस्त, उनके गांववाले और उनके चाहने वालों की भारी भीड़ एयरपोर्ट के बाहर थी। साथ ही रोहतक से कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी पहुंचे हुए थे, जो विनेश को एयरपोर्ट से बाहर लेकर आए। पहले से ही विनेश फोगाट के नाम के नारे लग रहे थे और ढोल बज रहे थे लेकिन विनेश के बाहर आते ही ये आवाज और तेज हो गई।

 फिर जैसे ही विनेश (Vinesh Phogat) को उनके संघर्ष के साथी बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक दिखे, जो पहले से ही उनके स्वागत के लिए मौजूद थे, वो उनसे लिपट गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। साथ में विनेश की मां भी थीं और उन्होंने अपनी लाडली बेटी का चेहरा हाथों में लेकर उसे चूमा और वो भी रोने लगीं। यही पल था जब ढोल और नारों के जश्न और शोर के बीच भी एक खामोशी महसूस होने लगी क्योंकि पूरा माहौल एकदम भावुक हो गया था। साक्षी की आंखें भी आंसुओं से भर आईं, जबकि बजरंग ने अपने जज्बातों को किसी तरह काबू किया।

विनेश वतन वापसी के बाद काफी भावुक नजर आईं। भारतीय पहलवान विनेश फोगट ने कहा, ‘मैं सभी देशवासियों का धन्यवाद करती हूं, मैं बहुत भाग्यशाली हूं।’

हड़ताल से लोहिया अस्पताल समेत निजी अस्पताल ठप, मरीजों में हाहाकार

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। देशव्यापी हड़ताल के तहत फर्रुखाबाद के डॉक्टरों ने भी अपनी सेवाएं बंद कर दीं, जिससे लोहिया अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों की चिकित्सा सेवाएं ठप हो गईं। हड़ताल का असर शहर के कोने-कोने में देखा गया, जहां इलाज के अभाव में मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
*लोहिया अस्पताल पर सबसे ज्यादा असर
लोहिया अस्पताल, जो कि जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, हड़ताल के चलते पूरी तरह से बंद रहा। अस्पताल के ओपीडी विभाग में ताले लगे रहे और सैकड़ों मरीज बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर हो गए। जिन मरीजों की सर्जरी तय थी, उन्हें भी हड़ताल के कारण तारीखें आगे बढ़ानी पड़ीं। एक आंकड़े के मुताबिक, लोहिया अस्पताल में लगभग 500 से अधिक मरीजों की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुईं, जबकि 30 से ज्यादा सर्जरी रद्द कर दी गईं।
*निजी अस्पतालों में भी सेवाएं ठप
हड़ताल का असर सिर्फ सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फर्रुखाबाद के निजी अस्पतालों में भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा। शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों जैसे नारायण अस्पताल, कमल नर्सिंग होम, और जीवा अस्पताल में डॉक्टरों ने हड़ताल का समर्थन करते हुए अपनी सेवाएं रोक दीं। इसके कारण सैकड़ों मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा।
*मरीजों में हाहाकार
इस हड़ताल के कारण मरीजों और उनके परिजनों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। इलाज के लिए दूर-दराज से आए मरीज अस्पतालों के बंद दरवाजों के सामने भटकते रहे। एक मरीज के परिजन ने कहा, हम दो दिन पहले यहां आए थे और आज ऑपरेशन होना था, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण हमें बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है। हमें नहीं पता कि अब क्या करेंगे। जिला प्रशासन हड़ताल के चलते उत्पन्न स्थिति को लेकर चिंतित है। प्रशासन ने स्थिति पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की और जल्द से जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे। अगर हड़ताल लंबी खिंचती है, तो इसका असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर और भी गंभीर हो सकता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है ताकि जल्द से जल्द मरीजों को राहत मिल सके।

गुरुजी समय पर नहीं पहुंचे स्कूल लगा ताला, विद्यालय के बाहर खड़े बच्चे

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यूथ इंडिया संवाददाता
अमृतपुर, फर्रुखाबाद। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में सरकार के द्वारा कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। लेकिन फिर भी समय से अध्यापक स्कूल न पहुंचने से बच्चों को कठिनाइयां झेलनी पड़ रही है।
विकास खंड राजेपुर क्षेत्र के गांव नीचे वाले चपरा का विद्यालय 8:54 तक बंद पाया गया। बच्चे स्कूल के बाहर खड़े थे। रास्ते से गुजर रहे जिला शाहजहांपुर की तहसील कलान के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष विजय प्रताप ने बच्चों को खड़ा देखा तो रुक गए बच्चों ने बताया कि गुरु जी अभी तक नहीं आए जिसको देखते हुए। विजय प्रताप के द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी अनूप सिंह को फोन पर जानकारी दी गई। बच्चों ने बताया की विद्यालय में प्रधानाध्यापक विपिन कुमार देवराज अध्यापक तैनात है जो 9 बजे से पहले नहीं आते वहीं बच्चे 8 बजे पहुंच कर गेट के बाहर खेलने लगते हैं जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी होने की संभावना बनी रहती है।

भ्रष्ट पूर्ति निरीक्षक के रहमो करम पर फल फूल रहा कोटेदारों का भ्रष्टाचार

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। प्रदेश में भ्रष्टाचार करने वाले वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी फिर भी बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं। जिसके कारण वह अपने से नीचे के कर्मचारियों से जमकर बसूली कर जेब गर्म करने में जुट जाते हैं।
वही तहसील अमृतपुर में तैनात पूर्ति निरीक्षक अमित चौधरी के द्वारा दोषी कोटेदारों के विरुद्ध कार्रवाई न करके भ्रष्टाचार में संलिप्त कई कोटेदारों का मनोबल बढ़ाने का कार्य कर वसूली करवा रहे हैं। बीते दिन कोटेदार राजकुमार के द्वारा ई केवाईसी के नाम पर रूपयों की वसूली करते समय लेखपाल के द्वारा पकड़ा गया था जिस पर भी भ्रष्ट पूर्ति निरीक्षक के द्वारा परदा डाल दिया। सीढे चकरपुर में कोटेदार के द्वारा खुलेआम राशन पर डाक़ा डाल गरीबों का राशन से हक छीना जा रहा था। तथा सबलपुर गांव में घटतौली का विरोध करने पर कोटेदार पुत्र के द्वारा देवर भाभी के साथ मारपीट भी कर दी गई लेकिन फिर भी प्रशासन नहीं जागा। नाम ना लिखने की सहमति पर सूत्रों ने बताया कि पूर्ति निरीक्षक के द्वारा महीने के हिसाब से 3000 हजार से लेकर 5000 रुपयों की वसूली की जाती है फिर मजबूरी में पैसे देने के बाद कोटेदार घटतौली करने में जुट जाते हैं। तथा कार्ड धारकों की राशन से छेड़छाड़ होने लगती है। जब साहब को महीने में पैसा ही देना है तो वह कोटेदार भी कहां से लाएं। वहीं सूत्रों के अनुसार जानकारी प्राप्त हुई है कि चाहे पूर्ति कार्यालय के कितने भी चक्कर लगा लो राशन कार्ड बनवाना है तो पहले अधिवक्ता, व पूर्ति कार्यालय के बाहर घूम रहे दलालों से मिल पैसे खर्च करना पड़ेगा अगर नहीं किया तो कुछ नहीं होता। जिससे क्षेत्र की जनता परेशान हो रही है। इसके बावजूद भी ऐसे भ्रष्टाचार के मसीहा के विरुद्ध उच्च अधिकारियों के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
पूर्ति निरीक्षक से बातचीत की तो बताया कि शीढ़ेचकर में घटतौली को लेकर सत्यता पाई गई है। रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई है। लेकिन अन्य जगह का मामला पूछते ही शिकायत न मिलने का बहाना कर बात टरका दी जब वीडियो वायरल हो चुके हैं तो संबंधित की जांच क्यों नहीं देखने वाली बात हो गई की कब जिला प्रशासन पूर्व निरीक्षक के विरुद्ध संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है।

फर्रुखाबाद में आपात स्वास्थ्य सेवाएं शून्य: हार्ट अटैक जैसी गंभीर मामलों में नहीं मिलता डॉक्टर

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यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का आलम यह है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। खासतौर पर हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थितियों में डॉक्टरों की अनुपलब्धता आम हो गई है, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है।
जिले में सरकारी और निजी अस्पतालों की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद, आपातकालीन सेवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। *स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार*, पिछले छह महीनों में जिले में 50 से अधिक हार्ट अटैक के मामले दर्ज किए गए, लेकिन इनमें से केवल 15 मामलों में ही मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल पाई। शेष मामलों में या तो डॉक्टर मौजूद नहीं थे या फिर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर कर दिया गया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई।
शहर के एक प्रमुख चिकित्सक का कहना है, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण मरीजों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है। खासतौर पर हार्ट अटैक जैसी स्थितियों में समय पर इलाज नहीं मिल पाना बेहद चिंताजनक है।
वहीं, जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का कहना है, हमारे पास डॉक्टरों की कमी है और कई बार रात में इमरजेंसी में डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते। हम उच्च अधिकारियों को इस बारे में सूचित कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की मांग की है। हाल ही में हुई एक बैठक में, नागरिकों ने तत्काल डॉक्टरों की नियुक्ति और 24 घंटे इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
इस गंभीर स्थिति में अगर प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए तो और भी कई जानें असमय काल के गाल में समा सकती हैं। फर्रुखाबाद के लोग बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद में हैं, लेकिन क्या उनकी यह उम्मीदें पूरी होंगी, यह समय ही बताएगा।

पूरे देश में चिकित्सा सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल

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यूथ इंडिया संवाददाता
नई दिल्ली, लखनऊ, फर्रुखाबाद। पूरे देश में चिकित्सक सुरक्षा अधिनियम को लागू करने की मांग को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल का व्यापक असर देखा गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी शनिवार को एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया, जिसमें हजारों डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं रोक दीं। वहीं, रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन भी अपनी मांगों पर डटा रहा, लेकिन उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पर पूरा भरोसा न जताते हुए बड़े स्तर पर अपने विरोध को जारी रखा।
चिकित्सक सुरक्षा अधिनियम को लागू करने की मांग को लेकर डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार हो रहे हमलों से सुरक्षा की आवश्यकता है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए ताकि वे बिना किसी भय के अपनी सेवाएं दे सकें। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में देशभर में डॉक्टरों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें 72′ डॉक्टरों ने किसी न किसी प्रकार की हिंसा का सामना किया है।
रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर अपने विरोध को जारी रखा है। आरडीए के अध्यक्ष डॉ. रोहित शर्मा ने कहा, आईएमए की हड़ताल से हमें कोई खास उम्मीद नहीं है। हम अपने स्तर पर सरकार पर दबाव बनाएंगे ताकि हमारी मांगें सुनी जाएं और हमारे हितों की रक्षा हो। उन्होंने आगे कहा कि आरडीए इस मुद्दे पर किसी भी तरह के समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जब तक कि चिकित्सक सुरक्षा अधिनियम लागू नहीं हो जाता।
डॉक्टरों की इस हड़ताल के कारण कई अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बाधित हो गईं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत देश के कई बड़े शहरों में मरीजों को अपने इलाज के लिए इधर-उधर भटकते देखा गया। अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं और कई मरीजों को अपनी बीमारियों के इलाज के लिए मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस हड़ताल से लगभग 50,000 से अधिक मरीजों की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुईं।
सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें आईएमए और आरडीए के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे इस आंदोलन को और भी बड़े स्तर पर ले जाएंगे।
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा यह असर अब सरकार के लिए एक चुनौती बन गया है। देखना होगा कि सरकार इस समस्या का समाधान कैसे निकालती है।